अंतरिक्ष में पहली बार लहलहाई धान की फसल, चीन के वैज्ञानिकों ने की सफल कटाई, दुनिया हैरान
China Space Farming: चीन ने अंतरिक्ष में पहली बार धान की सफल फसल तैयार कर उसकी कटाई की है. शेनझोउ-23 मिशन के तहत किए गए इस प्रयोग का मकसद कम गुरुत्वाकर्षण में धान की वृद्धि और दोबारा फसल उगाने की क्षमता को समझना है. यह सफलता भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों में इंसानों के लिए भोजन उगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.
Rice Harvest in Space: अंतरिक्ष में खेती को लेकर चीन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. चीनी अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने स्पेस स्टेशन में पहली बार धान की सफल फसल तैयार कर उसकी कटाई की है. यह प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने वाले इंसानों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. अगर अंतरिक्ष में ही भोजन उगाने की तकनीक विकसित हो जाती है, तो भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों में धरती से बार-बार खाना भेजने की जरूरत कम हो सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, शेनझोउ-23 मिशन के अंतरिक्ष यात्री मई में धान के बीज अपने साथ स्पेस स्टेशन लेकर गए थे. वहां अनुकूल परिस्थितियों में इन बीजों से फसल तैयार की गई और अब इसकी पहली कटाई भी सफलतापूर्वक पूरी हो गई है.
शून्य गुरुत्वाकर्षण में धान उगाने का प्रयोग
चाइना साइंस डेली के अनुसार, इस पूरे रिर्सच का मुख्य मकसद यह समझना है कि धरती से अलग वातावरण यानी बेहद कम गुरुत्वाकर्षण वाली स्थिति में धान का पौधा कैसे बढ़ता है. वैज्ञानिक यह भी देख रहे हैं कि अंतरिक्ष के माहौल में धान के पौधों में किसी तरह का आनुवंशिक बदलाव होता है या नहीं. इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि एक बार फसल तैयार होने के बाद उसी पौधे से दोबारा फसल उगाई जा सकती है या नहीं. इस प्रयोग के लिए जापोनिका किस्म के धान का इस्तेमाल किया गया. इस किस्म को चुनने की एक वजह यह है कि यह अलग परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता रखती है और सामान्य तौर पर करीब तीन से चार महीने में तैयार हो जाती है.
Aiming for world’s first two-generation rice cultivation in orbit! China’s Shenzhou-23 astronauts have completed a new rice-growing experiment aboard China’s space station, comparing two types of rice seeds to advance space farming. pic.twitter.com/oyzfMxbRSz
— LI Jian (@Europe_MFA_CHN) August 3, 2026
दो तरह के बीजों से किया गया प्रयोग
अंतरिक्ष यात्री अपने साथ दो तरह के बीज लेकर गए थे. पहले समूह में ऐसे बीज थे, जो कभी धरती के वातावरण से बाहर नहीं गए थे. दूसरे समूह में वे बीज शामिल थे, जो साल 2022 में अंतरिक्ष में पैदा हुए थे और बाद में धरती पर लगातार तीन सीजन तक उगाए गए थे. वैज्ञानिक दोनों समूहों की तुलना करके यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि, अंतरिक्ष का अनुभव पहले से हासिल कर चुके बीज दोबारा अंतरिक्ष में पहुंचने पर वहां के वातावरण में बेहतर तरीके से ढल पाते हैं या नहीं.
एक पौधे से दोबारा फसल उगाने की कोशिश
धान उगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक और खास तरीका अपनाया, जिसे रेटूनिंग मॉडल कहा जाता है. इसमें फसल तैयार होने के बाद पौधे का ऊपरी हिस्सा काट दिया जाता है, लेकिन जड़ों को मिट्टी में रहने दिया जाता है. इसके बाद उन्हीं जड़ों से दोबारा नई फसल उगाने की कोशिश की जाती है. अगर यह तरीका अंतरिक्ष में सफल साबित होता है, तो भविष्य के मिशनों के लिए यह काफी उपयोगी हो सकता है. इससे हर बार नए बीज ले जाने की जरूरत कम हो सकती है.
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए क्यों अहम?
अंतरिक्ष में भोजन उगाने की तकनीक भविष्य के लंबे मिशनों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है. अगर अंतरिक्ष यात्री खुद अपने लिए अनाज, सब्जियां या दूसरी फसलें उगा सकें, तो धरती से भोजन भेजने पर होने वाला खर्च और निर्भरता दोनों कम किए जा सकते हैं. चीन ने इससे पहले 2022 में भी अंतरिक्ष में बीज से दोबारा बीज तैयार करने का प्रयोग किया था. उस प्रयोग में करीब 120 दिनों में 59 नए बीज तैयार हुए थे. चीन पिछले करीब दो दशकों से अंतरिक्ष कृषि पर काम कर रहा है. इसकी शुरुआत 2006 में शिजियान-8 उपग्रह मिशन से हुई थी.
अब इस प्रयोग के दौरान तैयार धान की बालियां, बीज और पौधों के सुरक्षित रखे गए नमूनों को धरती पर लाया जाएगा. वैज्ञानिक इन नमूनों का अध्ययन करके यह समझेंगे कि अंतरिक्ष का पौधों पर किस तरह असर पड़ता है. इससे भविष्य में अंतरिक्ष में स्थायी खेती की तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है.