धान में डाल रहे NPK… फिर भी नहीं बढ़ रही फसल? जिंक का ये फॉर्मूला बदल देगा तस्वीर

धान में सिर्फ एनपीके डालना ही काफी नहीं होता. जिंक की कमी से पौधों की ग्रोथ रुक सकती है और कल्ले कम निकल सकते हैं. सही समय पर जिंक-यूरिया का इस्तेमाल करने से खैरा रोग पर नियंत्रण मिलता है और फसल की पैदावार बेहतर हो सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 3 Aug, 2026 | 03:44 PM

Paddy Cultivation: धान की फसल में किसान अक्सर अच्छी पैदावार के लिए एनपीके खाद का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार पर्याप्त पोषण देने के बाद भी पौधों की बढ़वार धीमी रहती है. इसका मुख्य कारण मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. खासतौर पर जिंक की कमी धान की फसल को काफी प्रभावित करती है. जिंक की कमी होने पर पौधे कमजोर हो जाते हैं, कल्ले कम निकलते हैं और पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान में सही समय पर जिंक का उपयोग करने से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार आता है.

जिंक की कमी से धान में दिखते हैं ये लक्षण

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की रोपाई  के 2 से 3 सप्ताह बाद अगर पौधों की नई और मध्यम पत्तियों पर हल्के पीले या भूरे-कांस्य रंग के धब्बे दिखाई देने लगें तो यह जिंक की कमी का संकेत हो सकता है. इस समस्या को खैरा रोग भी कहा जाता है. धीरे-धीरे पत्तियां सूखने लगती हैं, पौधों की लंबाई रुक जाती है और खेत में फसल कमजोर दिखाई देने लगती है. जिंक की कमी से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पौधे भोजन बनाने में कमजोर हो जाते हैं. इसका सीधा असर कल्ले निकलने और दाने बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है. कई बार किसान केवल यूरिया और एनपीके का प्रयोग करते रहते हैं, लेकिन जिंक की कमी पूरी नहीं होने से फसल को पूरा फायदा नहीं मिल पाता.

रोपाई के समय जिंक देने से मिलेगा बेहतर फायदा

धान की अच्छी बढ़वार  के लिए रोपाई से पहले या शुरुआती अवस्था में जिंक का इस्तेमाल करना सबसे प्रभावी माना जाता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, खेत की अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 10 से 12 किलोग्राम जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) या 7 से 8 किलोग्राम जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) मिट्टी में मिलाकर डाल सकते हैं. जलभराव वाली जमीन और ऐसी मिट्टी जहां लंबे समय तक पानी जमा रहता है, वहां जिंक की कमी ज्यादा देखने को मिलती है. ऐसे क्षेत्रों में किसानों को फसल की शुरुआत से ही जिंक प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.

जिंक-यूरिया स्प्रे से बढ़ेगी फसल की ताकत

अगर खड़ी धान की फसल  में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई दें तो किसान जिंक सल्फेट और यूरिया का छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए एक किलोग्राम जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) के साथ 2.5 किलोग्राम बुझा हुआ चूना या यूरिया को 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर 10 से 12 दिन बाद दोबारा स्प्रे किया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसान जिंक को सीधे डीएपी या एसएसपी के साथ मिलाकर न डालें. जिंक का प्रयोग अलग से या यूरिया के साथ करना ज्यादा लाभकारी रहता है. खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें और फसल की नियमित निगरानी करें. सही समय पर जिंक का उपयोग करने से धान में ज्यादा कल्ले निकलते हैं, पौधे स्वस्थ रहते हैं और किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सकता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 3 Aug, 2026 | 03:42 PM

लेटेस्ट न्यूज़