देश की 85 फीसदी चीनी सिर्फ 3 राज्यों से! किसानों की बढ़ी कमाई, शुगर सेक्टर में बड़ा धमाका
Sugar Industry: भारत में इस बार चीनी उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने मिलकर कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा दिया है. बेहतर रिकवरी और पेराई से किसानों को फायदा मिल रहा है. शुगर सेक्टर की मजबूती से गांवों की अर्थव्यवस्था भी तेजी से आगे बढ़ रही है.
Sugar Production: भारत में चीनी उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और इस बार भी तीन बड़े राज्य-महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने मिलकर पूरे शुगर सेक्टर को मजबूत बनाया है. 2025-26 के पेराई सीजन सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, देश के कुल उत्पादन का करीब 85 फीसदी हिस्सा सिर्फ इन तीन राज्यों से आया है. इससे साफ है कि ये राज्य न सिर्फ उत्पादन बढ़ा रहे हैं, बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा दे रहे हैं.
तीन राज्यों का दबदबा, 85 फीसदी उत्पादन यहीं से
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, इस सीजन में भारत में कुल 273.90 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी का उत्पादन हुआ है. इसमें से करीब 235 लाख टन सिर्फ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से आया है. महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जहां 99.20 LMT चीनी बनी. इसके बाद उत्तर प्रदेश ने 89.20 LMT और कर्नाटक ने 47.15 LMT उत्पादन किया. इन तीनों राज्यों का इतना बड़ा योगदान दिखाता है कि देश का शुगर सेक्टर काफी हद तक इन्हीं पर निर्भर है. खास बात यह है कि इन राज्यों में गन्ने की खेती बड़े स्तर पर होती है और यहां की मिलें भी अच्छी संख्या में काम कर रही हैं.
उत्पादन में बढ़ोतरी, पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन
इस बार देश का कुल चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग 7.70 फीसदी ज्यादा रहा है. महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा 23 फीसदी की बढ़त दर्ज की है, जो इसे नंबर-1 बनाता है. कर्नाटक में भी 16.07 फीसदी की अच्छी वृद्धि देखने को मिली है. हालांकि उत्तर प्रदेश में उत्पादन थोड़ा कम हुआ है, लेकिन फिर भी यह दूसरे स्थान पर बना हुआ है. कुल मिलाकर, उत्पादन के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत का शुगर सेक्टर मजबूत स्थिति में है और लगातार आगे बढ़ रहा है.
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शुगर सेक्टर मजबूत, उत्पादन बढ़ा, किसानों की आय बढ़ी.
रिकवरी रेट में यूपी सबसे आगे
रिकवरी रेट यानी गन्ने से चीनी बनने की दर भी इस बार बेहतर हुई है. उत्तर प्रदेश 10.20 फीसदी रिकवरी के साथ सबसे आगे है, जो देश में सबसे ज्यादा है. महाराष्ट्र की रिकवरी 9.50 फीसदी और कर्नाटक की 8.60 फीसदी रही. देश की औसत रिकवरी दर भी बढ़कर 9.55 फीसदी हो गई है, जो पिछले साल 9.37 फीसदी थी. इसका मतलब है कि अब कम गन्ने से ज्यादा चीनी बनाई जा रही है, जिससे किसानों और मिलों दोनों को फायदा हो रहा है.
पेराई और सहकारिता मॉडल से किसानों को फायदा
इस सीजन में करीब 2865.21 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है. देश में कुल 541 शुगर मिलों में से 21 मिलें अभी भी काम कर रही हैं. इन राज्यों में सहकारिता (Cooperative) मॉडल का बड़ा योगदान है, खासकर महाराष्ट्र में. इस मॉडल से किसान सीधे जुड़ते हैं और उन्हें बेहतर दाम और सुविधाएं मिलती हैं.
गन्ना किसानों की आय बढ़ रही है और गांवों में रोजगार के नए मौके भी बन रहे हैं. यही वजह है कि शुगर सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है.