खरीफ सीजन के लिए खाद की जरूरत 390 लाख टन, स्टॉक में केवल 195 लाख टन.. कैसे पूरी होगी डिमांड

किसान यूनियनों और किसान नेताओं का कहना है कि खरीफ सीजन के लिए खाद की जरूरत लगभग 390 लाख मीट्रिक टन है और उपलब्धता केवल 195 लाख मीट्रिक टन है. यानी जरूरत से आधा स्टॉक है. अब कम खाद स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ गई है. हालांकि, सरकार ने पर्याप्त खाद मौजूद होने की बात कही है.

नोएडा | Updated On: 10 May, 2026 | 06:51 PM

केंद्र सरकार का कहना है कि फसलों के लिए जरूरत के अनुसार देश में पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता है. कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में 390 लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत होगी. लेकिन 4 मई तक के उर्वरक स्टॉक के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा खाद का स्टॉक 195 लाख मीट्रिक टन है, जो जरूरत के हिसाब से 50 फीसदी ही है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है कि खरीफ फसलों की बुवाई के वक्त खाद की जरूरत पड़ने पर सरकार डिमांड कैसे पूरी करेगी. जानकार चिंतित हैं कि फिर से किसानों को खाद के लंबी लंबी लाइनें लगानी पड़ सकती हैं.

खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई मॉनसूनी बारिश के साथ शुरू हो जाती है. उत्तर भारत के हिस्सों में यह सीजन जून-जुलाई में शुरू हो जाता है. खरीफ फसलों में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन और तिलहन फसलों की खूब बुवाई की जाती है. बुवाई के वक्त और फसल की ग्रोथ स्टेज पर खाद की जरूरत होती है. जिन खाद की जरूरत होती है उनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी शामिल हैं. यह उर्वरक फसल को तेजी से अंकुरित करने और बढ़ाने में मदद करते हैं.

सरकार कह रही खूब खाद मौजूद पर आंकड़े बता रहे आधा स्टॉक

केंद्रीय उर्वरक विभाग ने कहा है कि देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और खरीफ मौसम के लिए आपूर्ति जरूरत से अधिक है. केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उर्वरक विभाग के अनुसार खरीफ सीजन 2026 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से उर्वरक की जरूरत 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है. जबकि, वर्तमान में उर्वरक भंडार लगभग 195.71 लाख मीट्रिक टन है यानी जरूरत की तुलना में आधा स्टॉक ही है. हालांकि, सरकार का कहना है कि बीते साल की समान अवधि में 174.98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक था, जिससे इस साल स्टॉक करीब 33 फीसदी अधिक है.

57 लाख टन यूरिया और अन्य उर्वरक आयात के लिए टेंडर जारी

नई दिल्ली में उर्वरक विभाग की अपर सचिव अपर्णा शर्मा ने 4 मई 2026 को जारी किए आंकड़ों में बताया कि उर्वरकों का घरेलू उत्पादन 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गया है. जबकि, आयात लगभग 15 लाख मीट्रिक टन है. इसके साथ ही देश में वर्तमान अवधि के लिए उर्वरक का कुल स्टॉक लगभग 78 लाख मीट्रिक टन हो गया है. उन्होंने बताया कि 38 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 19 लाख मीट्रिक टन फॉस्फेटिक और पोटैशियम युक्त उर्वरकों की खरीद के लिए वैश्विक टेंडर जारी किए गए हैं. यानी 57 लाख मीट्रिक टन उर्वरक विदेशों से मंगाई जा रही है. इस हिसाब से 78 लाख मीट्रिक टन उत्पादन की गई और 57 लाख मीट्रिक टन मंगाई जा रही उर्वरक को जोड़ दें तो 135 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक बैठता है.

घरेलू उत्पादन और आयात के बाद भी 50 लाख मीट्रिक टन खाद कम पड़ने की चिंता

अब मौजूद 195 लाख मीट्रिक टन खाद में 135 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और आयात जा रही खाद को जोड़ दें तो कुल उर्वरक का संभावित स्टॉक 330 लाख मीट्रिक टन होता है. इसका मतलब है कि खरीफ सीजन के लिए जरूरी खाद 390 लाख मीट्रिक टन की तुलना में अभी भी 50 लाख मीट्रिक टन उर्वरक कम है. जानकारों का कहना है कि अभी खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 1 महीने का वक्त है और घरेलू उर्वरक उत्पादन की गति को बढ़ा दिया गया है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जरूरत के वक्त खाद का स्टॉक सरकार पूरा कर लेगी.

देश में उपलब्ध खाद का मौजूदा स्टॉक.

देरी फसल उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और किसान की कमाई पर भारी न पड़ जाए

भारतीय किसान यूनियन मान के नेता गुणी प्रकाश ने खाद स्टॉक के मौजूदा आंकड़ों पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार तत्काल प्रभाव से उर्वरक उत्पादन और स्टॉक बढ़ाने पर काम करे. ताकि लगभग एक महीने बाद जब खाद की जरूरत पीक पर पहुंचे तो सप्लाई खत्म न हो जाए. उन्होंने कहा कि अभी लगभग 50 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की कमी साफ दिखाई दे रही है, जिसमें विदेशी आयात और घरेलू उत्पादन से पूरा होने की आशा जताई जा रही है. उन्होंने कहा कि आशा रखना ठीक है, लेकिन किसान को समय रहते खाद उपलब्ध कराना जरूरी है. नहीं तो फसल उत्पादन, किसान की कमाई और खाद्य सुरक्षा पर बुरा असर देखने को मिल सकता है.

Published: 10 May, 2026 | 06:34 PM

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