एक मक्खी और ऊंट की सेहत तबाह! जानिए बारिश में क्यों बढ़ता है सर्रा का खतरा

राजस्थान और गुजरात जैसे रेगिस्तानी इलाकों में ऊंटों को बारिश के मौसम में सर्रा नामक जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. बीमारी का वक्त पर इलाज जरूरी है, वरना जानलेवा हो सकती है.

धीरज पांडेय
नोएडा | Updated On: 10 Jul, 2025 | 09:44 PM

राजस्थान, गुजरात और रेगिस्तानी इलाकों में ऊंट सिर्फ सवारी या बोझ ढोने वाला जानवर नहीं, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी इस पर टिकी होती है. लेकिन जैसे ही बरसात आती है, एक छोटी सी मक्खी ऊंटों की सेहत बिगाड़ देती है. हम बात कर रहे हैं सर्रा रोग की, जो बरसात में सबसे ज्यादा फैलता है और ऊंटों की जान तक ले सकता है. चलिए समझते हैं कि यह बीमारी कैसे फैलती है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।

बरसात में ज्यादा फैलता है सर्रा रोग

सर्रा रोग को गांवों में तीबरसा या गलत्या के नाम से भी जाना जाता है. यह बीमारी ऊंटों में एक खून चूसने वाली मक्खी की वजह से फैलती है, जिसे टेबेनस कहते हैं. मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब यह मक्खी किसी बीमार ऊंट को काटती है और फिर किसी सेहतमंद ऊंट को काट लेती है तो बीमारी फैल जाती है. इस बीमारी की वजह एक परजीवी होता है, जो खून में रहता है और ऊंट को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है. इतना ही नहीं, बरसात के मौसम में ये मक्खियां ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं, जिससे बीमारी तेजी से फैलने लगती है.

सर्रा रोग में ऐसे दिखते हैं ऊंट के लक्षण

शुरुआत में ऊंट बिल्कुल सामान्य नजर आता है, लेकिन धीरे-धीरे उसमें बुखार, खून की कमी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इससे कूबड़ सिकुड़ने लगता है, जांघों की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं और ऊंट चारा-पानी छोड़ देता है. आंख और नाक से पानी बहने लगता है, पेट के नीचे सूजन आ जाती है और थुई (जननांग) भी गायब हो जाती है. इसके अलावा, खून की कमी की वजह से आंखों की पलकें अंदर से सफेद हो जाती हैं. मादा ऊंट में गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

सर्रा की जांच और रोकथाम के लिए सरकार का विशेष अभियान

सर्रा रोग की पुष्टि के लिए वेटरनरी डॉक्टर ताजा खून का नमूना या ब्लड स्मीयर लेते हैं और उसे ‘जीम्सा स्टेनिंग’ तकनीक से जांचते हैं. माइक्रोस्कोप के जरिए वे खून में मौजूद परजीवी की पहचान करते हैं. राजस्थान सरकार  ने इस बीमारी को गंभीर मानते हुए सर्रा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत ऊंटों का समय-समय पर टीकाकरण और इलाज किया जाता है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

सर्रा रोग से बचाव के उपाय

  • ऊंटों के रहने की जगह साफ-सुथरी रखें.
  • कीटनाशक का छिड़काव करें ताकि मक्खियों की संख्या कम हो.
  • ‘एंट्रीसाइड प्रोसाल्ट’ इंजेक्शन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से कर सकते हैं.
  • रोगी ऊंट को तुरंत अलग रखें, ताकि बाकी पशुओं को संक्रमण न फैले.
  • सुरामिन दवा भी डॉक्टर की सलाह पर दी जा सकती है, जो परजीवी को खत्म करती है.
  • संक्रमण वाले इलाकों में पहले से ही बचाव के लिए सुरामिन का प्रयोग किया जा सकता है.

पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह

बरसात के समय ऊंटपालकों को खास सतर्क रहना चाहिए. अगर ऊंट सुस्त दिखाई दे, खाना-पीना छोड़ दे या उसके शरीर पर सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज न करें. यह सर्रा रोग के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, जो समय पर इलाज मिलने पर ठीक हो जाता है, लेकिन देर होने पर जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए हर ऊंट पालन करने वाले पालक को यह  जानना जरूरी है कि यह बीमारी कैसे फैलती है, इसके लक्षण क्या हैं और समय रहते कैसे इलाज किया जाए. साथ ही, ऊंटों के रहने की जगह साफ रखना और मक्खियों से बचाव भी बेहद जरूरी है.

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Published: 10 Jul, 2025 | 08:20 PM
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