गर्मी से पहले जल संकट की आहट, देश के166 बड़े बांधों में पानी घटकर 62 प्रतिशत रह गया

CWC की रिपोर्ट के अनुसार इन 166 जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 अरब घन मीटर (बीसीएम) है. फिलहाल इनमें 113.160 बीसीएम पानी ही उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 61.65 प्रतिशत है. हालांकि यह स्तर पिछले साल के मुकाबले 11.5 प्रतिशत अधिक और पिछले दस साल के औसत से 25 प्रतिशत ज्यादा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Feb, 2026 | 08:09 AM

इस साल मौसम की बेरुखी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. देशभर में कम बारिश होने के कारण बड़े जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत के 166 प्रमुख बांधों में पानी का भंडारण उनकी कुल क्षमता के 75 प्रतिशत से नीचे आ गया है. यह स्थिति गर्मी शुरू होने से पहले ही चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

कुल क्षमता के मुकाबले कितना भरा पानी

CWC की रिपोर्ट के अनुसार इन 166 जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 अरब घन मीटर (बीसीएम) है. फिलहाल इनमें 113.160 बीसीएम पानी ही उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 61.65 प्रतिशत है. हालांकि यह स्तर पिछले साल के मुकाबले 11.5 प्रतिशत अधिक और पिछले दस साल के औसत से 25 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन मौजूदा समय में गिरावट का रुख चिंता पैदा कर रहा है.

साप्ताहिक बुलेटिन के मुताबिक अब केवल चार जलाशय ही पूरी तरह भरे हुए हैं. 80 प्रतिशत से ज्यादा भंडारण वाले बांधों की संख्या घटकर 20 प्रतिशत रह गई है, जबकि 22 प्रतिशत से ज्यादा जलाशयों में पानी 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है.

बारिश की भारी कमी

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस साल 18 फरवरी तक देश में 56 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. मध्य भारत में स्थिति और गंभीर है, जहां 85 प्रतिशत तक वर्षा की कमी रही. 727 जिलों से मिले आंकड़ों के अनुसार देश के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई है. यही वजह है कि जलाशयों का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.

दक्षिण भारत की स्थिति

दक्षिण भारत के 47 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर कुल 55.288 बीसीएम क्षमता के मुकाबले 29.371 बीसीएम यानी 53.12 प्रतिशत है. आंध्र प्रदेश में भंडारण 66.5 प्रतिशत है, जबकि तमिलनाडु में 59 प्रतिशत. केरल में 55 प्रतिशत, कर्नाटक में 49 प्रतिशत और तेलंगाना में 44 प्रतिशत पानी बचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण भारत में कुछ राहत ला सकता है.

पश्चिम और मध्य भारत

पश्चिमी क्षेत्र के 53 जलाशयों में कुल 38.094 बीसीएम क्षमता के मुकाबले 27.684 बीसीएम यानी 73 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. गोवा का एकमात्र बांध 75 प्रतिशत भरा है, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में स्तर 73 प्रतिशत है.

मध्य भारत के 28 जलाशयों में पानी 48.588 बीसीएम क्षमता के मुकाबले 31.868 बीसीएम यानी 66 प्रतिशत है. छत्तीसगढ़ में लगभग 79 प्रतिशत भंडारण है, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह 60 प्रतिशत से कम है. मध्य प्रदेश में यह स्तर 67 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

उत्तर और पूर्वी क्षेत्र में चिंता

उत्तरी भारत के 11 जलाशयों में कुल 19.836 बीसीएम क्षमता के मुकाबले 11.330 बीसीएम यानी 57 प्रतिशत पानी है. पंजाब और राजस्थान में भंडारण 65 प्रतिशत से ऊपर है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में यह घटकर 50 प्रतिशत रह गया है.

पूर्वी भारत के 27 जलाशयों में पानी 21.759 बीसीएम क्षमता के मुकाबले 11.33 बीसीएम यानी 59 प्रतिशत है. मेघालय का जलाशय 96 प्रतिशत भरा है, लेकिन असम में यह केवल 26 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 40 प्रतिशत से कम है. ओडिशा में 63 प्रतिशत, जबकि झारखंड और त्रिपुरा में 60 प्रतिशत से अधिक भंडारण है.

वहीं, गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ पानी की मांग बढ़ने वाली है. अगर आने वाले हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जलाशयों का स्तर और गिर सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जल प्रबंधन और सावधानी ही इस समय सबसे बड़ा उपाय है. फिलहाल सभी क्षेत्रों में भंडारण 75 प्रतिशत से नीचे आना इस बात का संकेत है कि पानी बचाने की जरूरत पहले से ज्यादा है.

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