FCI और WFP के बीच ऐतिहासिक समझौता, 2031 तक दुनिया के जरूरतमंदों को भारत से मिलेगा चावल

नई दिल्ली में FCI और WFP के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं. यह करार वर्ष 2031 तक लागू रहेगा. जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. समझौते के अनुसार FCI अधिकतम 25 प्रतिशत टूटे दानों वाला चावल WFP को देगा. फिलहाल इसकी कीमत 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Feb, 2026 | 08:00 AM

दुनिया के कई देशों में आज भी लाखों लोग भरपेट भोजन से वंचित हैं. कहीं युद्ध की वजह से हालात खराब हैं तो कहीं सूखा और महंगाई ने लोगों की थाली खाली कर दी है. ऐसे मुश्किल समय में भारत ने एक अहम पहल की है. फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी FCI ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के साथ समझौता किया है, जिसके तहत भारत दो लाख टन चावल जरूरतमंद देशों तक पहुंचाएगा. यह सिर्फ अनाज की आपूर्ति नहीं, बल्कि मानवता की मदद की एक मजबूत कोशिश है.

क्या है पूरा समझौता

नई दिल्ली में FCI और WFP के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं. यह करार वर्ष 2031 तक लागू रहेगा. जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. समझौते के अनुसार FCI अधिकतम 25 प्रतिशत टूटे दानों वाला चावल WFP को देगा. फिलहाल इसकी कीमत 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी. इसके बाद हर साल कीमत की समीक्षा दोनों पक्ष मिलकर करेंगे. सरकार का कहना है कि यह चावल WFP की मानवीय सहायता योजनाओं में इस्तेमाल होगा, जिससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भूख से जूझ रहे लोगों तक भोजन पहुंचाया जा सकेगा.

भारत का संदेश: कोई भूखा न रहे

केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इस पहल को भारत की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से जोड़ा है. उनका कहना है कि भारत सिर्फ चावल नहीं भेज रहा, बल्कि उम्मीद और सम्मान भी भेज रहा है. उन्होंने साफ कहा कि भारत दुनिया के साथ मिलकर कुपोषण और खाद्य असुरक्षा के खिलाफ खड़ा रहेगा. WFP के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने भी इस समझौते की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत का सहयोग आने वाले पांच सालों में लाखों कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाने में मदद करेगा.

FCI की तैयारी और क्षमता

FCI देशभर में किसानों से अनाज खरीदकर उसे सुरक्षित गोदामों में रखती है और जरूरत पड़ने पर वितरण करती है. तमिलनाडु के अवडी जैसे बड़े डिपो में चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है. अच्छी खरीद और मजबूत भंडारण व्यवस्था की वजह से भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद करने की स्थिति में है. इस समझौते से देश के किसानों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है. निर्यात बढ़ने से बाजार में स्थिरता बनी रहती है और अनाज की मांग मजबूत होती है.

वैश्विक संकट में राहत की किरण

आज दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट गहरा रहा है. जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं और आर्थिक चुनौतियां हालात को और कठिन बना रही हैं. ऐसे समय में भारत की यह पहल एक राहत की किरण बनकर सामने आई है. दो लाख टन चावल की आपूर्ति से लाखों परिवारों की थाली में भोजन पहुंच सकेगा. यह कदम दिखाता है कि भारत सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सोच रहा है. आने वाले वर्षों में यह साझेदारी वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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Published: 20 Feb, 2026 | 08:00 AM

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