महाराष्ट्र में सहकारी विकास को नई रफ्तार, 3,000 करोड़ निवेश से डेयरी, इथेनॉल और CBG सेक्टर मजबूत होंगे

सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की गई है. इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और नई उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा देना है. इससे किसानों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे तथा रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी.

नोएडा | Published: 22 Jun, 2026 | 04:01 PM

Cooperative Industry: देश में सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार महाराष्ट्र में सहकारी उद्योगों को नई ऊर्जा देने के लिए कुल 3,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की घोषणा की गई है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ाना और किसानों व सहकारी चीनी मिलों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाना है. सरकार का मानना है कि इससे राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

1,500 करोड़ रुपये का सहकारी प्रोसेसिंग संयंत्र

घोषित परियोजनाओं  में पहली बड़ी पहल के तहत 1,500 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक सहकारी प्रोसेसिंग संयंत्र स्थापित किया जाएगा. इस संयंत्र में मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. यहां साइट्रिक एसिड का उत्पादन किया जाएगा, जिसका उपयोग खाद्य, फार्मास्यूटिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है. इसके अलावा गोबर और सीरे से संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी. इससे कृषि अवशेषों और अपशिष्ट पदार्थों का बेहतर उपयोग होगा तथा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.

डेयरी, इथेनॉल और शुगर उद्योगों को मिलेगा लाभ

इन परियोजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके माध्यम से डेयरी, इथेनॉल और शुगर उद्योगों के लिए आधुनिक संयंत्र और मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी. इससे सहकारी क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों की कार्यकुशलता में सुधार होगा. नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों के उपयोग से उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी तथा उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी. मंत्रालय के अनुसार, इससे सहकारी उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप खुद को तैयार कर सकेंगे.

लाभ का उपयोग फिर होगा सहकारी चीनी मिलों के लिए

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन परियोजनाओं से होने वाले लाभ का उपयोग दोबारा सहकारी चीनी मिलों और उनसे जुड़े हितधारकों के विकास में किया जाएगा. इससे सहकारी मॉडल को और अधिक मजबूत आधार मिलेगा. किसानों, गन्ना उत्पादकों और सहकारी संस्थाओं को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है. यह पहल केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

महाराष्ट्र को वैश्विक सहकारी विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में कदम

सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, ये दोनों परियोजनाएं महाराष्ट्र की सहकारी इंडस्ट्री को नई तकनीक, नई ऊर्जा और नई पहचान देने का काम करेंगी. साइट्रिक एसिड उत्पादन, सीबीजी गैस संयंत्र और आधुनिक औद्योगिक मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निवेश से राज्य को वैश्विक सहकारी निर्यात और विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा बल्कि किसानों और सहकारी संस्थाओं की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा.

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