चीनी ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! 9 सितंबर को तय होगा पेराई सीजन, कीमतों पर पड़ेगा सीधा असर

चीनी की कीमतों पर जल्द राहत मिलेगी या मिलों की चिंता बढ़ेगी? महाराष्ट्र में 9 सितंबर को होने वाली अहम बैठक में गन्ना पेराई की तारीख तय हो सकती है. केंद्र ने 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का सुझाव दिया है, लेकिन मिलें रिकवरी घटने को लेकर चिंतित हैं.

नोएडा | Updated On: 8 Sep, 2026 | 03:52 PM

Sugarcane Farmers: महाराष्ट्र में आगामी गन्ना पेराई सत्र को लेकर 9 सितंबर को होने वाली अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में गन्ने की पेराई कब से शुरू की जाए, इस पर फैसला हो सकता है. केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का सुझाव दिया है. सरकार के सामने एक ओर बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर चीनी मिलों के हितों और उनकी आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा.

15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का सुझाव

केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में चीनी मिलों  को 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने का सुझाव दिया है. इसका उद्देश्य नए सीजन की चीनी को बाजार में जल्द उपलब्ध कराना है, ताकि आपूर्ति बढ़े और कीमतों में राहत मिल सके. महाराष्ट्र देश के प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल है. ऐसे में यहां पेराई सीजन की शुरुआत का सीधा असर चीनी की उपलब्धता और बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है.

मिलों को जल्दी पेराई से नुकसान की चिंता

हालांकि चीनी उद्योग जल्दी पेराई शुरू  करने को लेकर चिंतित है. मिलों का कहना है कि अगर गन्ना पूरी तरह तैयार होने से पहले उसकी पेराई शुरू कर दी जाती है, तो चीनी की रिकवरी दर कम हो सकती है. इसका मतलब है कि उतने ही गन्ने से मिलों को पहले की तुलना में कम चीनी मिल सकती है. इससे उत्पादन लागत बढ़ने और मिलों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. यही वजह है कि उद्योग समय से पहले पेराई शुरू करने के फैसले को लेकर सावधानी बरतने की मांग कर रहा है.

महाराष्ट्र में 15.43 लाख हेक्टेयर में गन्ना

गन्ने की फसल  पर मौसम का असर भी इस पूरे मामले को महत्वपूर्ण बना रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई तक महाराष्ट्र में करीब 15.43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल खड़ी थी. हालांकि राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश कम रहने से गन्ने के उत्पादन और पैदावार पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है. ऐसे में पेराई की तारीख तय करते समय फसल की स्थिति और गन्ने की तैयारियों को भी ध्यान में रखना होगा.

बाजार और मिलों के बीच संतुलन की चुनौती

9 सितंबर की बैठक में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजार और चीनी मिलों के हितों  के बीच संतुलन बनाने की होगी. अगर पेराई जल्द शुरू होती है, तो नई चीनी बाजार में जल्दी आ सकती है और आपूर्ति बढ़ने से उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है. वहीं, जल्द पेराई से रिकवरी घटने पर मिलों को नुकसान का डर है. अब देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार केंद्र के 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के सुझाव को स्वीकार करती है या गन्ने की स्थिति और रिकवरी को देखते हुए कोई दूसरी तारीख तय करती है.

Published: 8 Sep, 2026 | 03:51 PM

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