Sugar Price Hike: देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. कई राज्यों में चीनी के भाव 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं. कर्नाटक के बीजापुर में मिल स्तर पर चीनी 63-64 रुपये किलो तक पहुंच गई है. बेलगाम में भाव 63-63.60 रुपये और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 62.60-64 रुपये प्रति किलो के बीच है. उत्तर प्रदेश के कई केंद्रों पर भी चीनी 60 रुपये किलो से ऊपर बिक रही है. खास बात यह है कि सरकार ने हाल ही में 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है. इसके बावजूद बाजार में तेजी बनी हुई है.
कई राज्यों में 60 रुपये के पार चीनी के भाव
चीनीमंडी की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के प्रमुख बाजारों में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. बीजापुर में मिल स्तर पर भाव 63 से 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. बेलगाम में यह 63 से 63.60 रुपये और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 62.60 से 64 रुपये प्रति किलो के बीच दर्ज किया गया. उत्तर प्रदेश के कई केंद्रों पर भी चीनी की कीमत 60 रुपये प्रति किलो से अधिक बनी हुई है. त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में इस तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है. कारोबारियों और उपभोक्ताओं की नजर अब सरकार के आयात फैसले और आने वाले गन्ना पेराई सीजन पर है.
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को दी मंजूरी
बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक को देखते हुए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है. इसके अलावा थोक खरीदारों, डीलरों और अन्य कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को उचित स्तर पर बनाए रखना है. हालांकि, कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी तैयार करने में समय लगता है. ऐसे में आयात का असर बाजार में तुरंत दिखाई देने के बजाय कुछ समय बाद नजर आ सकता है.
ISMA ने कहा- देश में चीनी की कोई कमी नहीं
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने सरकार के आयात फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. मिलों के पास नए सीजन की चीनी आने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. बल्लानी के मुताबिक, इस साल चीनी की पेराई 10-15 दिन पहले शुरू होने की उम्मीद है. इससे नई चीनी की सप्लाई भी सामान्य से पहले बाजार में पहुंच सकती है. उनका कहना है कि सरकार का कच्ची चीनी के आयात का फैसला एहतियाती कदम है, जिसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार को अतिरिक्त सुरक्षा देना है.
सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी से बढ़ी तेजी?
ISMA के अनुसार, चीनी की कीमतों में हालिया तेजी केवल वास्तविक मांग और आपूर्ति की स्थिति पर आधारित नहीं है. त्योहारों से पहले घबराहट में की जा रही खरीदारी भी कीमत बढ़ने की वजह हो सकती है. उद्योग संगठन का मानना है कि आयात और जल्द शुरू होने वाली पेराई से बाजार में नई सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में स्थिरता आ सकती है. वहीं, MEIR Commodities के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राहिल शेख ने कहा कि कच्ची चीनी के लिए फिलहाल आयात समता बन रही है, लेकिन सरकार की अधिसूचना में दी गई समय सीमा कम है. उनके मुताबिक, सफेद चीनी के आयात की अनुमति मिलने पर बाजार में राहत जल्दी पहुंच सकती थी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत के आयात फैसले का असर देखने को मिला. गुरुवार को अक्टूबर लंदन ICE सफेद चीनी का भाव 10 अंक बढ़कर 552.20 पर बंद हुआ. अब बाजार की नजर कच्ची चीनी के आयात, गन्ने की पेराई शुरू होने और नई चीनी की आवक पर है. यही तय करेगा कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम नरम पड़ते हैं या तेजी आगे भी जारी रहती है.