कपास के भाव में फिर उछाल, CCI ने 700 रुपये प्रति कैंडी बढ़ाए दाम.. कीमतों में और तेजी के आसार

घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में तेजी जारी है. CCI ने सोमवार को भाव 700 रुपये प्रति कैंडी बढ़ाए. नई फसल की आवक में देरी, मिलों की मजबूत मांग और घटते स्टॉक से कीमतों को सहारा मिल रहा है. वहीं, कपास की बुवाई 106 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गई है. वैश्विक बाजार में भी कपास की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं.

नोएडा | Updated On: 11 Aug, 2026 | 07:42 AM

घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में तेजी का दौर जारी है. वैश्विक बाजार में मजबूती और घरेलू मांग बढ़ने के चलते कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने सोमवार को कपास के दाम 700 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) बढ़ा दिए. मिलों की मजबूत मांग और घटते स्टॉक से भी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है. कारोबारियों का कहना है कि नई कपास की आवक में देरी हुई तो आने वाले दिनों में कीमतों में और तेजी रह सकती है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में CCI की कपास कीमतों में करीब 1,400 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी हुई है. रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूभ के मुताबिक, इस साल मॉनसून की देरी और इसके कारण कपास की बुवाई देर से होने से नई फसल की आवक भी पीछे चल रही है. इससे कीमतों को मजबूती मिल रही है. मजबूत मांग के चलते रीसेल बाजार में भी कपास की अच्छी मांग बनी हुई है. अभी प्रेस की गई कपास की गांठों का भाव करीब 67,500 से 68,500 रुपये प्रति कैंडी चल रहा है. वहीं, रीसेलर्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के भाव CCI की कीमतों से करीब 1,000 रुपये प्रति कैंडी ज्यादा हैं. कीमतें बढ़ने के बावजूद CCI की बिक्री अच्छी बनी हुई है. सोमवार को CCI ने करीब 70,000 गांठ कपास बेची. पिछले सप्ताह करीब 2 लाख गांठों की बिक्री हुई थी. अब तक CCI की कुल बिक्री करीब 91.5 लाख गांठ पहुंच गई है, जबकि उसके पास करीब 14 लाख गांठ कपास का स्टॉक अभी बचा हुआ है.

कपास की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है

वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है. ICE पर दिसंबर डिलीवरी वाले कॉटन फ्यूचर्स का भाव करीब 84 सेंट प्रति पाउंड के आसपास पहुंच गया है. कमजोर डॉलर, अमेरिका के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की चिंता और वैश्विक स्टॉक घटने की उम्मीद से कीमतों को सहारा मिल रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, 2026-27 में वैश्विक कपास बाजार में सप्लाई और मांग का अंतर बढ़ सकता है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुमान के अनुसार, इस दौरान कपास की खपत उत्पादन से ज्यादा रहने और वैश्विक स्टॉक घटने की संभावना है. ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान में भी कपास के दाम मजबूत हुए हैं.

मिलों की मजबूत खरीद से कपास को सहारा

भारत में भी कपास बाजार को घरेलू और निर्यात मांग में सुधार से समर्थन मिल रहा है. कॉटन यार्न की मांग बढ़ने से कपास की खपत में तेजी आई है. कई स्पिनिंग मिलें मोटे धागे का उत्पादन बढ़ा रही हैं, जिसमें कच्चे कपास की खपत ज्यादा  होती है. देश में कपास की खपत पहले के अनुमान से ज्यादा मजबूत दिख रही है. मौजूदा स्टॉक को देखते हुए अनुमान है कि सितंबर के अंत तक भारत में कपास का बचा हुआ स्टॉक 75-80 लाख गांठ रह सकता है. सीमित आवक, मिलों की मजबूत खरीद और 2025-26 सीजन की कपास की कम उपलब्धता से घरेलू बाजार में कीमतों को मजबूती मिल रही है. इस बीच, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के सिंचित इलाकों में जल्दी बोई गई कपास की आवक शुरू हो गई है. रायचूर, बेल्लारी और नलगोंडा जैसे बाजारों में सिंचाई से तैयार कच्ची कपास धीरे-धीरे पहुंच रही है. इसकी कीमत फिलहाल 8,800-9,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है.

किस राज्य में कितना है कपास का रकबा

देश में कपास की बुवाई का रकबा अब पिछले साल के स्तर के करीब पहुंच गया है. 7 अगस्त तक देशभर में 106 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी थी. ऐसे सीजन के ज्यादातर समय रकबा पिछले साल से पीछे चल रहा था, लेकिन अब इसमें तेजी आई है. गुजरात में कपास का रकबा बढ़कर 20.87 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले साल यह 20.35 लाख हेक्टेयर था. वहीं,  तेलंगाना में 19.05 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 5.81 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 3.46 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है. इसके अलावा तमिलनाडु में 0.50 लाख हेक्टेयर और ओडिशा में 2.24 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है. वहीं, महाराष्ट्र में रकबा 37.84 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 38.28 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है. कर्नाटक और राजस्थान में भी कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम रहा. कपास बाजार में तेजी का दौर जारी है.

 

 

Published: 11 Aug, 2026 | 07:41 AM

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