अल नीनो को लेकर बढ़ी चिंता, सरकार ने 197 जिलों को किया चिन्हित, किसानों के लिए तैयार किया खास प्लान

El Nino Effect On Farmers: अल नीनो के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट पर है. सरकार ने देश के 197 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां कम बारिश और सूखे का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है. किसानों की मदद के लिए हर राज्य के लिए अलग तैयारी की गई है और बीज समेत जरूरी कृषि सामग्री का स्टॉक भी रखा गया है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 10 Jun, 2026 | 11:30 PM

El Nino Update: देश में मानसून की एंट्री हो चुकी है और कई राज्यों में बारिश भी शुरू हो गई है. लेकिन इसी बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल अल नीनो (El Niño) के असर की आशंका जताई है. माना जाता है कि अल नीनो सक्रिय होने पर बारिश कम हो सकती है, जिससे खेती-किसानी पर असर पड़ता है.

इसी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि, देश के 197 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां अल नीनो का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.

आखिर क्या है अल नीनो?

अल नीनो एक मौसम संबंधी स्थिति है, जो प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने के कारण बनती है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में आमतौर पर अल नीनो का संबंध कमजोर मानसून और कम बारिश से जोड़ा जाता है. जब अल नीनो सक्रिय होता है तो कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होती है. इसका सीधा असर खेती, जलाशयों और किसानों की आय पर पड़ सकता है.

सरकार ने क्यों बढ़ाई निगरानी?

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार लगातार अल नीनो की स्थिति पर नजर रख रही है. हालांकि अभी इसके असर को लेकर पूरी तरह कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन एहतियात के तौर पर तैयारी शुरू कर दी गई है. उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय हर सप्ताह समीक्षा बैठक कर रहा है. साथ ही खेती से जुड़ी जरूरी चीजों जैसे बीज और अन्य कृषि संसाधनों का पर्याप्त भंडारण भी किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत सहायता मिल सके.

197 जिलों पर खास नजर

सरकार ने देशभर के 197 जिलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है. इन जिलों में बारिश कम होने या सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा ज्यादा माना जा रहा है. हालांकि सरकार ने अभी इन सभी जिलों की पूरी सूची जारी नहीं की है, लेकिन संबंधित राज्यों के प्रशासन और कृषि विभाग को पहले से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

कम बारिश से क्या हो सकता है नुकसान?

अगर मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो सबसे ज्यादा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है. धान, मक्का, सोयाबीन, दालें और अन्य खरीफ फसलें बारिश पर काफी हद तक निर्भर होती हैं. कम बारिश होने पर फसलों की पैदावार घट सकती है. इससे किसानों की आमदनी प्रभावित हो सकती है और बाजार में खाद्यान्न की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इसके अलावा जलाशयों में पानी कम जमा होने से सिंचाई और पेयजल की समस्या भी बढ़ सकती है.

मानसून की क्या है मौजूदा स्थिति?

दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल पहुंच चुका है और धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों में आगे बढ़ रहा है. फिलहाल मानसून देश के लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्से को कवर कर चुका है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 जुलाई के आसपास मानसून पूरे देश में पहुंच जाएगा. हालांकि मौसम वैज्ञानिक लगातार अल नीनो पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि आने वाले महीनों में इसका असर ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है.

ऐसे में किसानों को मौसम की जानकारी पर नजर रखनी चाहिए और कृषि विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करना चाहिए. समय रहते तैयारी करने से कम बारिश या मौसम में बदलाव से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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Published: 10 Jun, 2026 | 11:30 PM

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