PM के संसदीय क्षेत्र में किसानों का हल्लाबोल, नाराज किसान बोले- मुआवजा नहीं अपनी जमीन चाहिए

वाराणसी में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के खिलाफ किसानों ने बड़ा विरोध दर्ज कराया. महापंचायत में हजारों ग्रामीण शामिल हुए और उन्होंने साफ कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं, बल्कि अपनी पुश्तैनी जमीन चाहिए. किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यदि दबाव बनाया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

नोएडा | Published: 30 Jun, 2026 | 02:48 PM

Varanasi farmers protest: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Industrial corridor opposition) को लेकर किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. वाराणसी के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के अमीनी और अदमापुर गांवों में भूमि अधिग्रहण की आशंका के बीच हजारों किसानों ने महापंचायत कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की. किसानों ने साफ कहा कि उन्हें किसी भी हालत में मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पुश्तैनी जमीन ही चाहिए.

महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब

वाराणसी के अमीनी गांव और आसपास  के क्षेत्रों में भारी पुलिस और पीएसी बल की तैनाती कर दी गई थी. माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ था. शाम होते-होते गांव में महापंचायत शुरू हुई, जिसमें एक हजार से अधिक किसान और बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. इस दौरान किसान एकता जिंदाबाद और जमीन हमारी मां है, इसका सौदा नहीं करेंगे जैसे नारे लगातार गूंजते रहे. किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मौजूदगी और दबाव के कारण माहौल डराने वाला बना दिया गया, जिससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया.

बैठक रुकने पर भड़का गुस्सा, पुलिस पर रोकने का आरोप

किसान नेताओं  का कहना है कि सुबह प्रस्तावित बैठक के संयोजक को पुलिस ने रोक दिया, जिसके चलते शुरुआती बैठक नहीं हो सकी. इससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. बाद में किसानों ने सेवापुरी विधायक से संपर्क किया. उनके प्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद देर शाम महापंचायत आयोजित की जा सकी. किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने ही खेतों तक जाने से रोका जा रहा है और पूरे क्षेत्र में अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है.

प्रशासन का दावा- फिलहाल कोई अधिग्रहण योजना नहीं

महापंचायत  के दौरान विधायक प्रतिनिधि ने वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) अधिकारी से स्पीकर फोन पर बात कराई. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमीनी और अदमापुर गांव फिलहाल वीडीए की किसी भी योजना में शामिल नहीं हैं और न ही वहां किसी परियोजना के लिए अधिग्रहण प्रस्ताव है. इसके बाद जिलाधिकारी सतेंद्र कुमार से भी बातचीत कराई गई. उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि बिना सहमति किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाएगा. डीएम ने कहा कि यदि भविष्य में किसी परियोजना की आवश्यकता होगी, तो पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और किसानों की सहमति से ही आगे बढ़ेगी.

आश्वासन के बावजूद अड़े किसान, आंदोलन की चेतावनी

प्रशासन के आश्वासन के बावजूद किसानों का रुख नरम नहीं हुआ. महापंचायत में मौजूद ग्रामीणों और महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि उनकी जमीन ही उनकी आजीविका का आधार है और वे इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया टकराव पैदा करने वाला है. वहीं किसानों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी भूमि अधिग्रहण की कोशिश की गई तो आंदोलन को और तेज  किया जाएगा. महापंचायत के बाद माहौल शांत जरूर हुआ, लेकिन ग्रामीणों के बीच असंतोष और आशंका अभी भी बनी हुई है.

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