World Wildlife Day: गुजरात के कच्छ में 10 साल बाद लौटा गोडावन, दुर्लभ पक्षी के जन्म से बढ़ीं नई उम्मीदें

World Wildlife Day: गुजरात के कच्छ में करीब दस साल बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावन के चूजे का जन्म हुआ है. इस सफलता ने दुर्लभ पक्षी संरक्षण अभियान को नई उम्मीद दी है. विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास और नई तकनीक की मदद से यह उपलब्धि मिली, जिसे वन्यजीव संरक्षण की बड़ी जीत माना जा रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 31 Mar, 2026 | 03:50 PM

Amazing Birds: गुजरात के कच्छ से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद खुश करने वाली खबर आई है. करीब 10 साल बाद यहां गोडावन यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) का एक चूजा जन्मा है. यह सिर्फ एक चूजे का जन्म नहीं, बल्कि उस दुर्लभ पक्षी की वापसी की उम्मीद है, जो कभी भारत के घास के मैदानों की शान हुआ करता था. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे देश के संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताया है. यह उपलब्धि नई जम्पस्टार्ट अप्रोच से मिली, जिसने गोडावन को बचाने की मुहिम में नई जान फूंक दी है.

10 साल बाद कच्छ में गूंजी नई चहचहाहट

कच्छ के घास के मैदानों में पिछले एक दशक से गोडावन के किसी चूजे के जन्म  की खबर नहीं आई थी. यहां केवल तीन मादा GIB बची थीं और कोई नर नहीं था, इसलिए प्राकृतिक रूप से अंडे के उपजाऊ होने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी थी. ऐसे मुश्किल हालात में यह जन्म किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा. 26 मार्च को मादा GIB ने चूजे को जन्म दिया, जिसे अब उसकी पालक मां प्राकृतिक माहौल में पाल रही है.

राजस्थान से गुजरात तक 770 किलोमीटर का मिशन

इस सफलता के पीछे एक बेहद खास और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन रहा. राजस्थान के सैम संरक्षण केंद्र से एक उपजाऊ अंडे को पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखकर सड़क मार्ग से बिना रुके 770 किलोमीटर दूर नलिया, कच्छ लाया गया. यह सफर 19 घंटे से ज्यादा चला. 22 मार्च को इस अंडे को घोंसले में रखा गया, जहां मादा GIB ने उसे सेया और आखिरकार 26 मार्च को चूजा बाहर आया. इस पूरे मिशन को जम्पस्टार्ट अप्रोच नाम दिया गया, जो भारत का पहला सफल अंतर-राज्यीय GIB संरक्षण  प्रयास बना.

कई एजेंसियों ने मिलकर लिखी सफलता की कहानी

इस पूरे अभियान को पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC), राजस्थान और गुजरात वन विभाग, और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने मिलकर अंजाम दिया. विशेषज्ञों ने पहले से योजना बनाकर इस मिशन को तैयार किया था, क्योंकि गुजरात में नर गोडावन की गैरमौजूदगी सबसे बड़ी चुनौती थी. टीम ने यह सुनिश्चित किया कि अंडा सुरक्षित तरीके से सही घोंसले तक पहुंचे और प्राकृतिक माहौल बना रहे. यही वजह है कि चूजे का जन्म सफल रहा और अब उसकी 24 घंटे निगरानी की जा रही है.

प्रोजेक्ट GIB को मिली नई उम्मीद

प्रोजेक्ट GIB की परिकल्पना 2011 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने की थी और इसे 2016 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया. इस प्रजनन सीजन में राजस्थान के सैम और रामदेवरा केंद्रों में पांच नए चूजे जुड़ चुके हैं. इसके बाद देश में संरक्षण कार्यक्रम के तहत GIB की कुल संख्या 73 तक पहुंच गई है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गुजरात में यह जन्म आने वाले समय में गोडावन की संख्या बढ़ाने में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.

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Published: 31 Mar, 2026 | 03:50 PM
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