मध्य पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध का विषय सोमवार को राज्यसभा में उठाया गया. ईरान-इजरायल युद्ध के गंभीर प्रभावों पर बात करते हुए राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे एक गंभीर वैश्विक और पर्यावरणीय मुद्दा कहते हुए भारत के गुजरात, राजस्थान और पंजाब के इलाकों में खेती और पशु के साथ ही मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया है. उन्होंने कहा कि रोजाना खतरनाक मिसाइलों से अटैक किया जा रहा और जिसके चलते एसिड रेन देखी जा रही है और भयंकर स्तर पर वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. जिसका असर भविष्य में भारत के कृषि और अन्य क्षेत्र पर पड़ने की चिंता है. किसान इंडिया ने जब इस बारे पर्यावरण विशेषज्ञ और कृषि वैज्ञानिकों से बात की उन्होंने भी भारतीय खेती और परिवेश को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई और खेती के साथ ही जलीय जीवों और वनों के लिए खतरे की चेतावनी दी है.
ईरान में उपजे काले बादल भारत के लिए भी खतरा
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि ईरान-इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध अब एक महीने से अधिक समय से जारी है और इसके परिणाम केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहे हैं. इस युद्ध के कारण विश्व में कई संकट उत्पन्न हुए हैं. पूरी दुनिया में ईंधन और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं का संकट गहराता जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि इससे भी बड़ा खतरा पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, जो धीरे-धीरे भारत की ओर बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण ईरान में उपजे काले बादल बम के बराबर ही खतरनाक हैं. उन्होंने कहा कि भले ही भारत पर मिसाइल या बम नहीं गिर रहे हों, लेकिन ईरान के ऊपर छाए ‘काले बादल’ भारत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में एयर स्ट्राइक (हवाई हमलों) के कारण ऑयल रिफाइनरी और गैस भंडारों में भीषण आग लगी है, जिससे भारी मात्रा में जहरीला धुआं वातावरण में फैल गया है.
गुजरात, राजस्थान और पंजाब में कृषि समेत अन्य क्षेत्रों पर बुरे असर आशंका
संजय राउत ने कहा कि इस धुएं में सल्फर, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य खतरनाक रसायन शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं. उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. उन्होंने ब्लैक रेन व इससे होने वाले स्वास्थ्य संकट की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. ईरान के कुछ हिस्सों में ‘ब्लैक रेन’ यानी काली बारिश की घटनाए सामने आई हैं, जो विषैले तत्वों से भरी हुई है. उन्होंने विशेषज्ञों के हवाले से आशंका जताई कि यह प्रदूषण देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में भारत के पश्चिमी राज्यों जैसे कि गुजरात, राजस्थान और पंजाब पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. इससे न केवल वायु गुणवत्ता खराब हो सकती है, बल्कि एसिड रेन का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे फसलें बर्बाद होने, मिट्टी के दूषित होने और लोगों में सांस संबंधी बीमारियां तथा कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं के बढ़ने की आशंका है.
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संजय राउत ने राज्यसभा में मुद्दा उठाया.
हवा से बहकर आने वाला प्रदूषण खेती के लिए खतरनाक – पर्यावरण वैज्ञानिक
हिमाचल प्रदेश की वाईएस परमार हॉर्टिकल्चर फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर एसके भारद्वाज ने किसान इंडिया को बताया कि धुआं या प्रदूषण हवा के बहाव में एक जगह से दूसरी तरफ बहकर जाता है. प्रदूषण की कोई सीमा नहीं होती है यह मौसमी हवाओं के प्रभाव से कई हजार किलोमीटर दूर तक बहकर पहुंच जाता है. उन्होंने बताया कि प्रदूषण का हमेशा से खेती पर बुरा असर देखा गया है. उन्होंने कहा कि पौधों, फसलों में ब्लैक कार्बन जमा होगा तो भारी नुकसान पहुंचेगा. वन क्षेत्र के लिए भी यह संकट बनेगा.
समंदर का प्रदूषित पानी जलीय जीवों के लिए बड़ा खतरा
खाड़ी देशों में हो रहे युद्ध के चलते रोजाना मिसाइल और राकेट हमलों से भारी मात्रा में हवाई प्रदूषण पैदा हो रहा है और स्थानीय स्तर पर तो नुकसान पहुंचा ही रहा है और वह उड़कर दूसरे हिस्सों में पहुंच रहा है. पर्यावरण वैज्ञानिक डॉक्टर एसके भारद्वाज ने बताया कि समंदर में राकेट दागे जाने से पानी प्रदूषित हो रहा है और वह बहकर दूसरे देशों की सीमाओं को पार कर जा रहा है. यह प्रदूषण पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है. इससे खेती ही नहीं जलीय जीव और पशुओं को श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं और मानव भी इसके दुष्प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय परिवेश को कितना नुकसान होगा यह स्टडी के बाद ही पता चल सकता है.
प्रदूषण पौधों और फसलों के लिए गंभीर खतरा बन रहा- कृषि वैज्ञानिक
झांसी स्थित रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और निदेशक (शिक्षा) डॉ. अनिल कुमार ने किसान इंडिया को बताया कि मिसाइल और रॉकेट विस्फोट विनाशकारी घटनाएं हैं. इससे बड़े पैमाने पर जनहानि, बुनियादी ढांचे का विनाश और पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान पहुंचता है. उन्होंने बताया कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र- जैसे पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, मिट्टी और जल संसाधन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका खतरे में पड़ सकती है. उन्होंने बताया कि इन विस्फोटों से होने वाले प्रदूषण का प्रभाव कृषि के लिए एक बड़ा खतरा है. पौधों पर कार्बन जमा होने की स्थिति गंभीर हो सकती है और पौधों की वृद्धि को रोक सकती है, बीजों को नुकसान पहुंचा सकती है और फसलों की उत्पादकता को बहुत कम कर सकती है.
संभावित नुकसान और खतरे का आकलन जरूरी, तभी उपाय लागू हो सकेंगे
सांसद संजय राउत ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है. राउत ने कहा कि इस मामले में पर्यावरण विशेषज्ञों की एक टीम गठित की जाए. इस समिति द्वारा भारत पर संभावित प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जाए. खास तौर पर भारत के पश्चिमी राज्यों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए. अलर्ट सिस्टम तैयार रखा जाए. उन्होंने कहा कि भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस पर्यावरणीय संकट के खिलाफ आवाज भी उठाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह वैश्विक पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है.
पर्यावरण वैज्ञानिक एसके भारद्वाज और कृषि शिक्षा निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए स्टडी जरूरी है. तभी संभावित खतरे का सटीक पता चलेगा और उस हिसाब से उपाय लागू किए जा सकेंगे.