ईरान-इजरायल युद्ध से भारत के कृषि निर्यात पर पड़ेगा असर, इन राज्यों को होगा ज्यादा नुकसान

ईरान में लंबे समय तक युद्ध जारी रहने से भारत के कृषि निर्यात पर असर पड़ सकता है. GTRI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कई कृषि उत्पादों की बिक्री खाड़ी देशों पर निर्भर है. चावल, फल-सब्जियां, मसाले और डेयरी उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जिससे किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ सकती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 Mar, 2026 | 08:14 AM

Agricultural Exports: ईरान-इजरायल में अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो इसका असर भारत के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है. रिसर्च संस्था Global Trade and Research Initiative (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया के देशों को करीब 11.8 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात किए, जो कुल कृषि निर्यात का पांचवां हिस्सा से भी ज्यादा है. ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने पर चावल जैसे अनाज, फल-सब्जियां, मसाले, मांस, डेयरी उत्पाद और पेय पदार्थों के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक,  GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि भारत के कई कृषि उत्पादों  की बिक्री काफी हद तक खाड़ी (गल्प) देशों के बाजारों पर निर्भर करती है. ऐसे में अगर युद्ध के कारण व्यापार में रुकावट लंबे समय तक रहती है, तो इसका सीधा असर भारत के किसानों, फूड प्रोसेसिंग उद्योग और निर्यातकों पर पड़ सकता है. सबसे ज्यादा असर चावल के निर्यात पर पड़ने की आशंका है. 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को करीब 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया, जो देश के कुल चावल निर्यात का लगभग 36.7 फीसदी है. इसलिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के चावल उत्पादकों के लिए खाड़ी देशों का बाजार बेहद अहम है. यानी इन राज्यों के कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है.

70 फीसदी से ज्यादा निर्यात पश्चिम एशिया में होता है

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ उत्पाद ऐसे हैं जिनका 70 फीसदी से ज्यादा निर्यात पश्चिम एशिया में होता है, इसलिए इन पर जोखिम सबसे अधिक है. इनमें भेड़-बकरी का मांस (98.9 फीसदी), ताजा या ठंडा बीफ (97.4 फीसदी), सूखा नारियल (83.9 फीसदी), बीयर (81 फीसदी), केला (79.6 फीसदी) और जायफल, जावित्री व इलायची जैसे मसाले (70.5 फीसदी) शामिल हैं.

 इन उत्पादों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों के बाजारों में निर्यात होता है

रिपोर्ट के अनुसार ये सेक्टर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, क्योंकि भारत के इन उत्पादों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों के बाजारों में ही निर्यात होता है. अगर वहां व्यापार प्रभावित होता है तो इन क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ सकता है. वहीं कुछ उत्पाद ऐसे भी हैं जिन्हें हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है, क्योंकि इनके करीब 40 फीसदी से 60 फीसदी निर्यात पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं. इनमें मक्खन और डेयरी फैट (58.1 फीसदी), सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य नॉन-अल्कोहलिक पेय (55.6 फीसदी), नारियल और पाम कर्नेल ऑयल (52.5 फीसदी), तैयार तंबाकू उत्पाद  (50.9 फीसदी), ताजी सब्जियां (50.8 फीसदी), चीज और दही (47.8 फीसदी), ताजे फल (44.8 फीसदी), चाय (44.1 फीसदी), सूरजमुखी, कुसुम या कपास के बीज का तेल (42.2 फीसदी) और सिगरेट, सिगार व सिगारिलो (40 फीसदी) शामिल हैं.

 नारियल और काजू 35.8 फीसदी निर्यात किए जाते हैं

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ उत्पाद मीडियम रिस्क श्रेणी में आते हैं, क्योंकि इनके कुल निर्यात का लगभग 25 फीसदी से 35 फीसदी हिस्सा पश्चिम एशिया के बाजारों में जाता है. इनमें चावल (36.7 फीसदी), नारियल और काजू (35.8 फीसदी), फ्रोजन बीफ (28.9 फीसदी), प्रोसेस्ड फल और मेवे (27.6 फीसदी), प्याज-लहसुन और उनसे जुड़ी सब्जियां (26.9 फीसदी), जीरा और धनिया जैसे मसाला बीज (23.4 फीसदी), अदरक और हल्दी जैसे मसाले (23 फीसदी) और सूखी दालें (21.9 फीसदी) शामिल हैं. ऐसे में अगर इस क्षेत्र में व्यापार प्रभावित होता है तो इन उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है.

कुछ उत्पाद लो-रिस्क श्रेणी में आते हैं

रिपोर्ट के अनुसार कुछ उत्पाद लो-रिस्क श्रेणी में आते हैं, क्योंकि इनके निर्यात का पश्चिम एशिया पर निर्भरता  अपेक्षाकृत कम है. इनमें कॉफी (17.7 फीसदी), ब्रेड, बिस्किट और अन्य बेकरी उत्पाद (17.7 फीसदी), कच्चा तंबाकू (16.9 फीसदी), अन्य खाद्य तैयारियां (16.9 फीसदी), चीनी (16.4 फीसदी) और झींगा-प्रॉन जैसे क्रस्टेशियन समुद्री उत्पाद (4.3 फीसदी) शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता बनी रहती है, तो इसका असर भारत की कृषि अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है. इसलिए निर्यातकों के लिए जरूरी है कि वे अपने बाजारों का दायरा बढ़ाएं और किसी एक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता कम करें.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 8 Mar, 2026 | 08:10 AM

लेटेस्ट न्यूज़