ग्रीन यूरिया की ओर बढ़ा भारत, सरकार ने प्लांट लगाने का रोडमैप किया तैयार, विदेश से आयात होगा कम

Green Urea: केंद्र सरकार देश में ग्रीन यूरिया बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए कई बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई है और आंध्र प्रदेश में पहला पायलट प्लांट लगाया जाएगा. सरकार का मानना है कि, इससे भविष्य में यूरिया आयात कम होगा.

नोएडा | Published: 27 Jun, 2026 | 07:45 AM

Green Urea Production India: भारत में खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. केंद्र सरकार अब देश में ग्रीन यूरिया (Green Urea) के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी में है. इसके लिए उर्वरक मंत्रालय ने उद्योग जगत के साथ अहम बैठक की है और शुरुआती संकेत बताते हैं कि, कई कंपनियां इस परियोजना में रुचि दिखा रही हैं. अगर यह योजना सफल होती है तो आने वाले समय में भारत को यूरिया आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ स्वच्छ और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.

क्या है ग्रीन यूरिया?

ग्रीन यूरिया एक नया तरह का खाद है, जिसे ग्रीन अमोनिया से बनाया जाता है. ग्रीन अमोनिया तैयार करने के लिए सूरज और हवा से मिलने वाली ऊर्जा के साथ पानी का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में बहुत कम प्रदूषण होता है. यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित और भविष्य की बेहतर खाद माना जा रहा है.

फिलहाल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) धान, तिलहन और गन्ने जैसी फसलों पर ग्रीन अमोनिया की उपयोगिता की जांच कर रही है. इन परीक्षणों से यह पता लगाया जा रहा है कि, यह फसलों के लिए कितना प्रभावी साबित होगा.

आंध्र प्रदेश में बनेगा पहला पायलट प्लांट

सरकार आंध्र प्रदेश के पुडिमडाका में ग्रीन यूरिया का नया प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है. इस प्लांट में हर दिन करीब 150 टन ग्रीन यूरिया बनाया जाएगा. इस परियोजना को एनटीपीसी की रिसर्च यूनिट NETRA तैयार करेगी.

इस प्लांट में ऐसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा, जिससे कम प्रदूषण के साथ ग्रीन यूरिया बनाया जा सके. सरकार का मकसद पहले इस तकनीक को सफल बनाना है, ताकि आगे चलकर देश में बड़े स्तर पर ऐसे और प्लांट लगाए जा सकें.

कई बड़ी कंपनियों ने दिखाई रुचि

ग्रीन यूरिया परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उर्वरक विभाग ने बड़ी कंपनियों के साथ अहम बैठक की. इसमें एनटीपीसी, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI), कई बड़ी खाद कंपनियों और ग्रीन हाइड्रोजन व ग्रीन अमोनिया के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों ने हिस्सा लिया. सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का इस परियोजना से जुड़ना दिखाता है कि देश में ग्रीन यूरिया का उत्पादन शुरू होने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है और आने वाले समय में इसका फायदा किसानों को मिल सकता है.

कई मंत्रालय मिलकर करेंगे काम

ग्रीन यूरिया परियोजना को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार के कई मंत्रालय मिलकर काम करेंगे. नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. वहीं, उर्वरक विभाग ग्रीन अमोनिया और ग्रीन यूरिया को देश की खाद उत्पादन व्यवस्था में शामिल करने की तैयारी कर रहा है.

सरकार क्यों देगी आर्थिक मदद?

अभी ग्रीन अमोनिया बनाना सामान्य अमोनिया के मुकाबले काफी महंगा पड़ता है. इसी वजह से ग्रीन यूरिया की कीमत भी ज्यादा होती है. इसे सस्ता बनाने के लिए सरकार मदद देने की तैयारी कर रही है. योजना के तहत SECI ग्रीन अमोनिया खरीदकर खाद कंपनियों को सामान्य अमोनिया की कीमत पर उपलब्ध कराएगी, जबकि दोनों की कीमत का अंतर सरकार खुद उठाएगी. इसके अलावा, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भी कंपनियों को आर्थिक मदद दी जाएगी. सरकार का लक्ष्य हर साल करीब 7.24 लाख टन ग्रीन अमोनिया खरीदने का है, ताकि देश में ग्रीन यूरिया का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सके.

किसानों को क्या होगा फायदा?

देश को भी बड़ा फायदा

भारत अभी भी हर साल करीब 1 करोड़ टन यूरिया अभी भी विदेशों से मंगाता है. अगर देश में बड़े पैमाने पर ग्रीन यूरिया बनने लगे, तो धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे किसानों को देश में बना, पर्यावरण के लिए बेहतर और आधुनिक खाद मिल सकेगा. साथ ही, उद्योगों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल भी ग्रीन यूरिया बनाने में होगा, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे भारत को 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी.

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