देश में 180 लाख टन से ज्यादा है खाद का स्टॉक, खरीफ सीजन में उर्वरक आपूर्ति को लेकर केंद्र ने बनाई रणनीति
ईरान-इजरायल जंग से पहले रोज करीब 80,000 टन यूरिया उत्पादन होता था, जो घटकर 30-35 हजार टन कम हो गया था. लेकिन अब स्पॉट मार्केट से गैस खरीदने के बाद उत्पादन बढ़कर करीब 67,000 टन प्रतिदिन हो गया है. सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि DAP के विकल्प के तौर पर SSP और TSP का इस्तेमाल करें.
Fertilizer availability: ईरान- इजरायल जंग के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ा भरोसा दिया है. उसने कहा है कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है. बल्कि हमारे पास उर्वरक स्टॉक पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. केंद्र ने कहा कि इस समय देश में 180 लाख टन से ज्यादा उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है, जो पिछले साल के 147 लाख टन से ज्यादा है. ऐसे में किसानों को उर्वरक को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. खरीफ सीजन में भी किसानों को प्रयाप्त मात्रा में खाद मिलती रहेगी.
केंद्र सरकार के अनुसार, इस साल खरीफ सीजन में उर्वरकों की करीब 390 लाख टन मांग को घरेलू उत्पादन और आयात के जरिए पूरा करने की तैयारी है. सरकार ने यूरिया प्लांट्स को ज्यादा गैस उपलब्ध कराई है, जिससे उत्पादन बढ़ा है. फिलहाल देश में 62 लाख टन यूरिया, 23.4 लाख टन डीएपी, 12.7 लाख टन एमओपी और 86.8 लाख टन कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का स्टॉक मौजूद है. सरकार अप्रैल-मई जैसे कम मांग वाले समय में इस भंडार को और बढ़ाने की योजना बना रही है.
खरीफ सीजन में खाद बिक्री और उपलब्धता
पिछले खरीफ सीजन में कुल 361 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई थी. इसमें 193.2 लाख टन यूरिया, 46.3 लाख टन डीएपी, 11 लाख टन एमओपी और 81.5 लाख टन कॉम्प्लेक्स उर्वरक शामिल थे. इससे साफ है कि इस बार सरकार पहले से बेहतर तैयारी के साथ किसानों की जरूरतों को पूरा करने पर जोर दे रही है. सरकार के अनुसार, अभी 30 में से 27 यूरिया प्लांट्स को गैस मिल रही है और गैस सप्लाई में काफी सुधार हुआ है. पहले जहां सप्लाई सिर्फ 60 फीसदी थी, अब बढ़कर करीब 80 फीसदी हो गई है. भारत DAP और यूरिया के आयात का करीब 30 फीसदी और LNG का लगभग 50 फीसदी खाड़ी देशों से लेता है, जो उर्वरक बनाने के लिए जरूरी है.
युद्ध से पहले देश में यूरिया का उत्पादन
युद्ध के असर से पहले रोज करीब 80,000 टन यूरिया उत्पादन होता था, जो घटकर 30-35 हजार टन कम हो गया था. लेकिन अब स्पॉट मार्केट से गैस खरीदने के बाद उत्पादन बढ़कर करीब 67,000 टन प्रतिदिन हो गया है. सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि DAP के विकल्प के तौर पर SSP और TSP का इस्तेमाल करें. साथ ही, खाड़ी देशों के अलावा मोरक्को और रूस जैसे देशों से कच्चा माल मंगाया जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे देशों से भी आयात के लिए बातचीत चल रही है.
क्या बोले किसान नेता
भारतीय किसान एकता (BKE) के प्रदेश अध्यक्ष लखविन्दर सिंह औलख ने किसान इंडिया से फोन पर बात करते हुए कहा कि हरियाणा में फिलहाल खाद की कोई कमी नहीं है, लेकिन बाजार में फैल रही किल्लत की अफवाहों से किसान परेशान हैं. उन्होंने कहा कि अभी स्थिति सामान्य है, लेकिन जून में धान की बुवाई शुरू होते ही उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ेगी. तब केंद्र सरकार को उर्वरक की उपलब्धता को लेकर खास ध्यान देना होगा. वहीं, भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और एमएसपी कमेटी के सदस्य गुणी प्रकाश ने भी कहा कि अभी तक हरियाणा में खाद की कमी का कोई मामला सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा कि असली स्थिति खरीफ सीजन शुरू होने पर साफ होगी, क्योंकि पूरे देश में धान की बुवाई के साथ यूरिया की मांग अचानक बढ़ जाती है.