FAI ने सरकार से मांगी राहत, गैस संकट और पैकिंग की कमी से यूरिया सप्लाई पर खतरा

गैस संकट के बीच अब एक और नई परेशानी सामने आई है. खाद की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक दाने जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और हाई-डेंसिटी पॉलीथीन की सप्लाई भी घट गई है. इसका असर यह हो रहा है कि कारखानों में तैयार खाद को समय पर पैक करना मुश्किल हो रहा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 24 Mar, 2026 | 07:50 AM

Urea supply crisis: देश में खेती के लिए सबसे अहम समय यानी खरीफ सीजन से पहले उर्वरक सेक्टर एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. गैस सप्लाई में आई कमी और पैकिंग सामग्री की किल्लत ने यूरिया उत्पादन और सप्लाई दोनों पर असर डालना शुरू कर दिया है. ऐसे हालात में फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने सरकार से तुरंत राहत देने की मांग की है, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके.

गैस की कमी से प्रभावित हुआ उत्पादन

यूरिया बनाने के लिए गैस सबसे जरूरी कच्चा माल होता है. लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण LNG गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. सरकार के नए गैस आपूर्ति नियमों के तहत खाद कारखानों को उनकी औसत जरूरत का सिर्फ 70 प्रतिशत गैस ही मिल रही है. इस कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है. कई बड़े यूरिया प्लांट अब पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं. इससे उत्पादन घटने का खतरा बढ़ गया है, जो आने वाले समय में किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

कंपनियों ने मांगी सरकार से राहत

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, इस संकट को देखते हुए उद्योग संगठन FAI ने सरकार को पत्र लिखकर कई अहम मांगें रखी हैं. उनका कहना है कि मौजूदा हालात असाधारण हैं, इसलिए कंपनियों को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए.

संस्था ने मांग की है कि प्लांट चलाने में बढ़ी ऊर्जा लागत की भरपाई सरकार करे. इसके अलावा गैस की कमी के कारण जो जुर्माना लगाया जा रहा है, उसे माफ किया जाए या वापस किया जाए. FAI का यह भी कहना है कि इस मुश्किल दौर में कंपनियों की वास्तविक ऊर्जा खपत को ही मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके.

पैकिंग सामग्री की कमी से बढ़ी नई समस्या

गैस संकट के बीच अब एक और नई परेशानी सामने आई है. खाद की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक दाने जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और हाई-डेंसिटी पॉलीथीन की सप्लाई भी घट गई है. इसका असर यह हो रहा है कि कारखानों में तैयार खाद को समय पर पैक करना मुश्किल हो रहा है. बंदरगाहों पर भी सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे वितरण में देरी की आशंका बढ़ गई है.

खरीफ सीजन से पहले बढ़ा दबाव

खरीफ सीजन की बुवाई जून से शुरू होती है और इस दौरान यूरिया की मांग सबसे ज्यादा होती है. किसान धान, मक्का और अन्य फसलों की बुवाई के समय बड़ी मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल करते हैं. अगर इसी समय सप्लाई में कमी आ गई, तो किसानों को खाद की कमी और महंगे दाम दोनों का सामना करना पड़ सकता है. इससे खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

सप्लाई चेन पर संकट का असर

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर गैस और पैकिंग दोनों की समस्या जल्द नहीं सुलझी, तो खाद की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो सकती है. इससे न सिर्फ किसानों बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र पर असर पड़ेगा. FAI ने सरकार से अपील की है कि वह इस स्थिति को गंभीरता से ले और तुरंत जरूरी कदम उठाए, ताकि सप्लाई चेन सुचारू बनी रहे.

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