रबी सीजन में खाद की किल्लत का खतरा! वैश्विक संकट के बीच सरकार अलर्ट, किसानों को चेतावनी

Fertilizer Shortage India: केंद्र सरकार ने कहा है कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसानों को फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है. हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव, आयात में रुकावट और वैश्विक आपूर्ति संकट के कारण आगामी रबी सीजन में खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.

नोएडा | Published: 31 May, 2026 | 04:00 PM

Fertilizer Stock: भारत में चल रहे खरीफ सीजन के दौरान किसानों को फिलहाल खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन आने वाले रबी सीजन को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं. अंतरराष्ट्रीय हालात और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब उर्वरक आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्क रहने और खाद के ज्यादा इस्तेमाल पर रोक लगाने की सलाह दी है.

खरीफ के लिए फिलहाल पर्याप्त है खाद का स्टॉक

केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए देश में खाद का भरपूर भंडार मौजूद है. आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में करीब 390 लाख टन उर्वरक की जरूरत रहने का अनुमान है. इसके मुकाबले 25 मई तक देश में लगभग 200 लाख टन खाद का स्टॉक उपलब्ध था, जो पिछले साल से अधिक है.

सरकार का मानना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को फिलहाल खाद की कमी महसूस नहीं होगी. हालांकि, आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियों के कारण स्थिति बदल सकती है.

रबी सीजन को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

उर्वरक विभाग के सचिव रजत कुमार मिश्रा के अनुसार, अभी यह कहना मुश्किल है कि रबी सीजन में खाद की स्थिति कैसी रहेगी. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से खाद की सप्लाई प्रभावित हो रही है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण भारत को यूरिया, डीएपी, अमोनिया और सल्फर जैसी जरूरी खादों की आपूर्ति में दिक्कत आ रही है. इसके अलावा होर्मुज जलमार्ग में खाद लेकर आने वाले कई जहाज फंसे हुए हैं, जिससे आयात प्रभावित हुआ है. अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो रबी सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

यूरिया और डीएपी की रिकॉर्ड बिक्री ने बढ़ाई चिंता

सरकार के सामने एक और चुनौती खाद की तेजी से बढ़ती खपत है. इस समय देश में प्रतिदिन लगभग 80 हजार टन यूरिया की बिक्री हो रही है, जो सामान्य से लगभग दोगुनी बताई जा रही है. मार्च से मई के बीच यूरिया की बिक्री में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है.

सिर्फ यूरिया ही नहीं, डीएपी की मांग में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है. मार्च से अब तक इसकी बिक्री पिछले साल की तुलना में 39 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा उपयोग और संभावित जमाखोरी जैसे कारणों की भी जांच की जरूरत है.

वैश्विक संकट का भारत पर असर

खाद बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता भी दुनिया भर में प्रभावित हुई है. मोरक्को जैसे बड़े फॉस्फोरस उत्पादक देश में सल्फर की कमी के कारण डीएपी और दूसरी खादों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. वहीं, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से गैस के दाम भी काफी बढ़ गए हैं. इससे खाद बनाने की लागत बढ़ गई है. इसी कारण भारत को भी यूरिया और डीएपी जैसी खादें पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत देकर आयात करनी पड़ रही हैं.

एग्रीस्टैक के जरिए नियंत्रित होगी खाद की बिक्री

खाद के सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है. खरीफ सीजन में कुछ राज्यों के चुनिंदा जिलों में एग्रीस्टैक आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा.

इस व्यवस्था के तहत किसानों के भूमि रिकॉर्ड और बोई गई फसल के आधार पर खाद की बिक्री की जाएगी. इससे जरूरत से ज्यादा खरीद, गलत उपयोग और अवैध डायवर्जन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

किसानों के लिए क्या है संदेश?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. जरूरत से ज्यादा खाद डालने से न केवल खर्च बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. ऐसे में संतुलित उर्वरक उपयोग और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना ही बेहतर उत्पादन और भविष्य की खाद सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है.

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