आलू-टमाटर को लंबे समय तक रोकने की दिक्कत दूर हो रही, सरकार का मात्रा पर नहीं मूल्य पर जोर

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि हमने जिस चीज पर ध्यान नहीं दिया और जिसे अब पीएम ने प्राथमिकता दी है, वह है 'वैल्यू' (मूल्य). उन्होंने कहा कि मांग में कमी की वजह से किसान सड़कों पर आलू और टमाटर नहीं फेंकते, बल्कि इसलिए फेंकते हैं क्योंकि उन्हें संभालकर रखने की जगह या क्षमताएं नहीं हैं. यह कमी सिर्फ प्रोसेसिंग से दूर हो सकती है.

नई दिल्ली | Updated On: 24 Jul, 2026 | 04:42 PM

किसानों के उत्पाद आलू, टमाटर आदि को लंबे समय तक संभालकर रखने की दिक्कत खत्म हो रही. केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कई दशकों तक हमने खेती में प्रोडक्शन और मात्रा पर ध्यान दिया, और यह सही भी था, क्योंकि एक समय ऐसा था जब भारत में खाने-पीने की चीजों की कमी थी. आज हम न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, बल्कि कई दूसरे देशों को भी खाना खिलाते हैं. उन्होंने कहा कि अब सरकार का उत्पादन वॉल्यूम यानी मात्रा की बजाय वैल्यू यानी मूल्य बढ़ाने पर जोर है.

आज हम अपना पेट भर रहे और दुनिया का भी

केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्री चिराग पासवान ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के ‘विकसित भारत 2047 के लिए विकसित कृषि’ कार्यक्रम में कहा कि पिछले दशक में भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर ने अच्छी रफ़्तार पकड़ी है, लेकिन वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) के मामले में अभी भी काफी कुछ किया जाना बाकी है. उन्होंने कहा कि कई दशकों तक, एक देश के तौर पर हमने खेती में प्रोडक्शन और मात्रा पर ध्यान दिया, और यह सही भी था, क्योंकि एक समय ऐसा था जब भारत में खाने-पीने की चीजों की कमी थी. आज हम न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, बल्कि कई दूसरे देशों को भी खाना खिलाते हैं.

किसानों के द्वारा आलू-टमाटर फेंकने की वजह बताई

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लेकिन हमने जिस चीज पर ध्यान नहीं दिया और जिसे अब मेरे पीएम मोदी ने प्राथमिकता दी है, वह है ‘वैल्यू’ (मूल्य). उन्होंने कहा कि मांग में कमी की वजह से किसान सड़कों पर आलू और टमाटर नहीं फेंकते, बल्कि इसलिए फेंकते हैं क्योंकि उन्हें संभालकर रखने की जगह या क्षमताएं नहीं हैं. यह कमी सिर्फ प्रोसेसिंग से दूर हो सकती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि PMFME के ​​ज़रिए हमने दो लाख उद्यमी बनाने का लक्ष्य रखा था और हमने वह लक्ष्य हासिल भी कर लिया है.

चिराग पासवान ने चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम को संबोधित किया.

घर पर पापड़-अचार बनाना भी प्रॉसेसिंग है, इसे बढ़ाना होगा

मैं लद्दाख में एक महिला से मिला जो कभी किसी और की सीबकथॉर्न यूनिट में काम करके महीने के आठ हजार रुपये कमाती थीं. पर आज वह करोड़ों के टर्नओवर वाला अपना बिज़नेस चलाती हैं और पच्चीस लोगों को रोजगार देती हैं. हमें इस सोच को भी बदलना होगा कि प्रोसेस्ड फ़ूड किसी तरह घटिया होता है. घर पर पापड़, अचार या दही बनाना भी प्रोसेसिंग ही है. अब हमारा काम क्वालिटी और बड़े पैमाने (स्केल) को एक साथ लाना है ताकि ‘मेड इन इंडिया’ दुनिया भर में हर डाइनिंग टेबल पर भरोसे का निशान बन जाए.

खेत से बाजार तक उपज पहुंचाने की प्रक्रिया आसान करना जरूरी

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि हमारी दो-तिहाई आबादी अभी भी खेती पर निर्भर है, और जिन कमियों की हम अक्सर बात करते हैं, वे खेत से बाजार तक उपज पहुंचाने की प्रक्रिया में होती हैं. आज टेक्नोलॉजी और जानकारी तक पहुंच इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रही है. ICC एग्री बिजनेस और फ़ूड प्रोसेसिंग कमेटी के चेयरमैन श्रीकांत गोयनका ने कहा कि हमें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती), कुशल सिंचाई, संरक्षित खेती, कटाई के बाद का प्रबंधन, वैल्यू एडिशन, बाजार से जुड़ाव और डिजिटल फैसले लेने की दिशा में सोचना होगा.

Published: 24 Jul, 2026 | 04:42 PM

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