मुफ्त राशन योजना में बड़ा बदलाव! RBI की डिजिटल करेंसी से मिलेगा अनाज, समिति की सिफारिश
मुफ्त राशन योजना को अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए संसदीय समिति ने डिजिटल ई-रुपी (CBDC) के जरिए राशन वितरण की सिफारिश की है. QR कोड आधारित व्यवस्था से कालाबाजारी रोकने, फर्जी लाभार्थियों पर लगाम लगाने और 79 लाख नए पात्र लोगों को योजना में शामिल करने की तैयारी है.
Free Ration Scheme: देश की मुफ्त राशन योजना में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. अगर संसदीय समिति की सिफारिशों पर सरकार आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में गरीबों को राशन लेने के लिए नकदी या पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल ई-रुपी के जरिए राशन वितरण की नई व्यवस्था लागू की जा सकती है. समिति का मानना है कि इससे राशन वितरण अधिक पारदर्शी होगा, कालाबाजारी पर रोक लगेगी और सरकारी सब्सिडी सीधे सही लाभार्थी तक पहुंचेगी.
डिजिटल फूड कूपन से बदलेगी राशन वितरण की व्यवस्था
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि डिजिटल ई-रुपी का इस्तेमाल चरणबद्ध तरीके से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में किया जाए. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को डिजिटल फूड कूपन या प्रोग्रामेबल डिजिटल करेंसी मिलेगी, जिसका उपयोग केवल राशन खरीदने के लिए किया जा सकेगा. इससे सब्सिडी का पैसा किसी अन्य उद्देश्य में खर्च नहीं होगा. लाभार्थी उचित दर की दुकान पर जाकर क्यूआर कोड स्कैन करेंगे और निर्धारित मात्रा में अनाज प्राप्त कर सकेंगे. समिति का कहना है कि यह प्रणाली तेज, सुरक्षित और निगरानी के लिहाज से अधिक प्रभावी साबित हो सकती है.
अब देशभर में विस्तार की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात और पुडुचेरी के कुछ क्षेत्रों में डिजिटल करेंसी आधारित राशन वितरण का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है. जिन लाभार्थियों ने अपनी ई-केवाईसी पूरी कर ली है, वे डिजिटल माध्यम से राशन प्राप्त कर रहे हैं. समिति का मानना है कि इस मॉडल से पारदर्शिता बढ़ी है और फर्जीवाड़े की संभावना कम हुई है. इसी अनुभव के आधार पर समिति ने सरकार से इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य राज्यों में भी लागू करने पर विचार करने की सिफारिश की है.
DBT मॉडल की होगी समीक्षा, 79 लाख नए लोगों को मिलेगा लाभ
संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत नकद हस्तांतरण (DBT) और अनाज के प्रत्यक्ष वितरण की विस्तृत तुलना करने का सुझाव भी दिया है. फिलहाल चंडीगढ़, पुडुचेरी और दादरा एवं नगर हवेली के शहरी क्षेत्रों में लाभार्थियों को अनाज के बदले सीधे बैंक खाते में राशि भेजी जा रही है. समिति का कहना है कि इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि लाभार्थियों को समय पर पैसा मिले, अनाज खरीदने में कोई दिक्कत न आए और कोई पात्र परिवार योजना से वंचित न रह जाए. साथ ही खाद्य मंत्रालय को 79 लाख अतिरिक्त पात्र लोगों को भी मुफ्त राशन योजना में शामिल करने की दिशा में तेजी से काम करने को कहा गया है.
फर्जी राशन कार्डों पर सख्ती, आधार से जुड़ चुका 99.8 फीसदी रिकॉर्ड
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक आधार सीडिंग अभियान के जरिए देशभर में करीब 6.77 करोड़ फर्जी या गलत राशन कार्ड हटाए जा चुके हैं. वर्तमान में 99.8 प्रतिशत राशन कार्ड आधार से लिंक हैं, जबकि 99.3 प्रतिशत लाभार्थियों का आधार प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है. समिति ने राज्यों से कहा है कि संदिग्ध लाभार्थियों की समयबद्ध फील्ड जांच की जाए, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति का राशन न रुके और फर्जी लाभ लेने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो सके. संसदीय समिति का मानना है कि डिजिटल तकनीक के सहारे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सकता है. यदि सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है, तो देश की करोड़ों राशन कार्डधारक आबादी के लिए मुफ्त राशन वितरण की पूरी व्यवस्था एक नए डिजिटल दौर में प्रवेश कर सकती है.