गुजरात के ऊंझा जीरा और सौंफ को मिला GI टैग, किसानों को 30 फीसदी तक दाम बढ़ने की उम्मीद
GI Tagged Products: गुजरात के मशहूर ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को GI टैग मिल गया है. इससे इन मसालों की देश-विदेश में अलग पहचान बनेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और किसानों को अपनी उपज के 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक दाम मिलने की उम्मीद है.
Gujarat GI Tag Products: गुजरात के किसानों के लिए एक बड़ी राहत और गर्व की खबर सामने आई है. राज्य के मशहूर ऊंझा जीरा (Unjha Cumin) और ऊंझा सौंफ (Unjha Fennel) को आखिरकार भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल गया है. इस मान्यता के बाद इन दोनों मसालों की पहचान सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के बाजारों में भी और मजबूत होगी. सबसे बड़ी बात यह है कि, इससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. सरकार का अनुमान है कि GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की कीमत सामान्य मसालों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक मिल सकती है.
कई संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से मिली सफलता
ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को GI टैग दिलाने के लिए कई संस्थाओं ने मिलकर काम किया. इसमें ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (APMC), गुजरात सरकार का बागवानी एवं किसान कल्याण विभाग, सरदारकृष्णनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय और एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII) की अहम भूमिका रही. लंबे प्रयासों के बाद इन दोनों मसालों को यह खास पहचान मिली है.
क्या होता है GI टैग और क्यों है यह इतना खास?
GI यानी भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) एक ऐसा प्रमाण है, जो किसी उत्पाद को उसकी खास भौगोलिक पहचान के आधार पर दिया जाता है. इसका मतलब है कि वह उत्पाद अपनी गुणवत्ता, स्वाद या विशेषता के कारण उसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ माना जाता है.
GI टैग मिलने के कई फायदे होते हैं. इससे नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है, असली उत्पाद की पहचान मजबूत होती है और विदेशी बाजारों में उसकी विश्वसनीयता बढ़ती है. यही वजह है कि GI टैग वाले उत्पादों की मांग और कीमत दोनों बढ़ने की संभावना रहती है.
किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद
राज्य सरकार का कहना है कि, GI टैग मिलने के बाद ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को बाजार में सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा कीमत मिल सकती है. इसका सीधा फायदा किसानों को होगा. साथ ही मसाला उद्योग, प्रोसेसिंग और निर्यात से जुड़े कारोबार को भी नई रफ्तार मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिलती है, तो उसकी मांग बढ़ती है और किसानों को बेहतर मुनाफा मिलने की संभावना भी मजबूत हो जाती है.
जीरा उत्पादन में गुजरात सबसे आगे
गुजरात देश का सबसे बड़ा जीरा उत्पादक राज्य है. वहीं सौंफ उत्पादन में भी राज्य की अहम हिस्सेदारी है. उत्तर गुजरात के मेहसाणा, पाटन, बनासकांठा और गांधीनगर जिले जीरा और सौंफ की खेती के प्रमुख क्षेत्र हैं. ऊंझा की मंडी एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडियों में गिनी जाती है. यहां गुजरात के अलावा राजस्थान के किसान भी बड़ी मात्रा में जीरा और सौंफ बेचने आते हैं. भारत दुनिया का सबसे बड़ा जीरा उत्पादक और निर्यातक देश है, जिसमें गुजरात की सबसे बड़ी भूमिका है.
गुजरात के GI उत्पादों की बढ़ी सूची
ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को GI टैग मिलने के बाद गुजरात के GI उत्पादों की सूची और लंबी हो गई है. इससे पहले गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारेक और अमलसाड़ी चीकू जैसे उत्पादों को भी यह सम्मान मिल चुका है.
सरकार का मानना है कि इससे गुजरात के कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी. साथ ही किसानों को बेहतर बाजार, निर्यात के नए अवसर और अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी. GI टैग न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह भारतीय कृषि उत्पादों की क्वालिटी और पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का भी मजबूत माध्यम बन रहा है.