20 हजार एग्री-उद्यमी तैयार करेगी ‘प्रगति’, 20 लाख छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'प्रगति' (PRAGATI) राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है. इसके तहत 20 हजार ग्रामीण कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे, जो 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों को तकनीक, बाजार, मशीनीकरण और वैल्यू एडिशन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने में मदद करेंगे.

Kisan India
नोएडा | Published: 7 Jul, 2026 | 02:25 PM

केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा देने की शुरुआत करते हुए मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) राष्ट्रीय पहल लॉन्च की. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि देश में विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब कृषि विकसित होगी और गांव समृद्ध होंगे. इस पहल के जरिए 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी (Agri Entrepreneurs) के रूप में तैयार किया जाएगा, जो देशभर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगे.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की वास्तविक आय बढ़ाना है. इसके लिए लागत कम करना, नई तकनीक अपनाना, खेती का विविधीकरण और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना आवश्यक है.

खेती से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है. किसानों को बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि फसलों का वैल्यू एडिशन, स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार संपर्क किसानों की आय बढ़ाने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि ‘प्रगति’ के तहत तैयार होने वाले कृषि-उद्यमी गांवों में किसानों को मृदा परीक्षण, कृषि मशीनों की उपलब्धता, वैज्ञानिक खेती, डिजिटल सलाह, वित्तीय सेवाओं और बाजार से जोड़ने का काम करेंगे. इससे किसानों की उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादकता बढ़ेगी.

महिला शक्ति और ग्रामीण युवा बनेंगे बदलाव की धुरी

शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम में महिला भागीदारी को विशेष महत्व देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में कृषि सखी और महिला कृषि-उद्यमी इस अभियान का अहम हिस्सा होंगी. उन्होंने कहा कि यदि गांव में एक सक्षम कृषि-उद्यमी तैयार हो जाए, तो वह पूरे गांव की खेती और आजीविका में बदलाव ला सकता है.
उन्होंने कहा कि सरकार राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार कर रही है ताकि प्रत्येक क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और फसल पैटर्न के अनुसार वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया जा सके. ड्रोन, डिजिटल कृषि सेवाएं, मशीनीकरण और आधुनिक तकनीक भविष्य की कृषि व्यवस्था का आधार बनेंगे.

आठ राज्यों में होगा पहला चरण, निजी और वैश्विक संस्थाओं का सहयोग

‘प्रगति’ परियोजना का पहला चरण मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य केवल किसानों को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि गांव स्तर पर एक ऐसा कृषि सेवा तंत्र विकसित करना है, जो लंबे समय तक किसानों को तकनीकी, वित्तीय और विपणन सहायता उपलब्ध करा सके.
इस कार्यक्रम को भारत में निजी क्षेत्र के सहयोग से शुरू किए गए सबसे बड़े कृषि-उद्यमिता अभियानों में से एक माना जा रहा है. इसमें पेप्सिको फाउंडेशन, एसबीआई फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, आईडीएच, हाइफर इंटरनेशनल, एनवायरमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री ऑन्त्रप्रेन्योरशिप एकेडमी, SAFIA, एग्री ऑन्त्रप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं साझेदार हैं.
ये संस्थाएं कृषि-उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय समावेशन, डिजिटल सेवाएं, बाजार संपर्क, जलवायु-अनुकूल खेती और पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगी.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘प्रगति’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में आर्थिक परिवर्तन का माध्यम है. उनका कहना था कि जब गांव आत्मनिर्भर बनेंगे, कृषि लाभकारी होगी और ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, तभी विकसित भारत का लक्ष्य वास्तविक रूप से हासिल किया जा सकेगा.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़