3 साल बाद गेहूं निर्यात की बंदिशें हटीं, भारत ने 5 लाख टन आटा-सूजी विदेश भेजने के लिए दी हरी झंडी दी
India Wheat Export: भारत ने करीब तीन साल के इंतजार के बाद फिर से गेहूं से बने कुछ उत्पादों को विदेश भेजने की इजाजत दे दी है. DGFT की अधिसूचना के मुताबिक, 5 लाख टन गेहूं का आटा और सूजी (सेमोलिना) एक बार के लिए बाहर भेजी जा सकती है. यह फैसला इस साल अच्छी फसल और अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता के बीच लिया गया है. इससे घरेलू बाजार में गेहूं पर्याप्त मात्रा में रहेगा और विदेशों में भी सप्लाई को फायदा मिलेगा.
Wheat Export: करीब तीन साल बाद भारत ने गेहूं से जुड़े कुछ उत्पादों के निर्यात को दोबारा मंजूरी दे दी है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब देश में इस साल अच्छी फसल की उम्मीद जताई जा रही है और घरेलू बाजार में सप्लाई मजबूत रहने की संभावना है. सरकार के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हलचल तेज हो गई है.
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से 16 जनवरी को जारी अधिसूचना के मुताबिक, भारत ने 5 लाख टन गेहूं से बने उत्पादों को विदेश भेजने की अनुमति दे दी है. इसमें गेहूं का आटा, सूजी (सेमोलिना) और इसी तरह के अन्य उत्पाद शामिल हैं. लेकिन सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह सिर्फ एक बार के लिए तय कोटे तक ही है और कच्चे गेहूं का निर्यात अभी भी बंद रहेगा.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मानना है कि इस साल देश में पिछले पांच साल का सबसे अच्छा मॉनसून रहा है. बेहतर बारिश के कारण गेहूं की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है. ऐसे में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद कुछ मात्रा में निर्यात की अनुमति देना संभव हो पाया है.
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इसके अलावा, देश के आटा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लंबे समय से सरकार से निर्यात खोलने की मांग कर रहे थे, ताकि अंतरराष्ट्रीय मांग का फायदा उठाया जा सके. नवंबर में ही संकेत मिलने लगे थे कि सरकार गेहूं उत्पादों के निर्यात पर दोबारा विचार कर रही है.
अमेरिका से ट्रेड टॉक्स भी बड़ी वजह
भारत का यह फैसला अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच आया है. अमेरिका चाहता है कि भारत अपने कृषि क्षेत्र को ज्यादा खोले और अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच दे. ऐसे में गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति को दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
हालांकि भारत ने संतुलन बनाते हुए सिर्फ प्रोसेस्ड गेहूं उत्पादों को ही निर्यात की मंजूरी दी है, ताकि घरेलू खाद्य सुरक्षा पर कोई असर न पड़े.
वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. ऐसे में उसकी आंशिक वापसी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है. इससे एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के उन देशों को राहत मिल सकती है जो गेहूं आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस कदम से गेहूं उत्पादों की वैश्विक कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और महंगाई से जूझ रहे देशों को कुछ राहत मिल सकती है.
क्या आगे पूरी छूट मिल सकती है?
फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि यह फैसला स्थायी नहीं है. घरेलू बाजार की स्थिति, महंगाई और फसल की वास्तविक स्थिति को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा. अगर उत्पादन अनुमान के मुताबिक रहता है और घरेलू सप्लाई संतुलित रहती है, तो आने वाले महीनों में निर्यात की सीमा और बढ़ाई जा सकती है.
कुल मिलाकर, भारत का यह कदम घरेलू हितों और वैश्विक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है, जिससे किसानों, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय बाजार-तीनों को फायदा मिल सकता है.