CWC Report: बढ़ती गर्मी से देश के डैम खाली होने की कगार पर, कई राज्यों में 30 फीसदी से नीचे पहुंचा जल स्तर

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जलाशयों का स्तर और गिर सकता है. मौसम विभाग ने कई हिस्सों में हीटवेव की संभावना जताई है, जिससे पानी की खपत बढ़ेगी और भंडारण तेजी से कम होगा. अगर समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो गर्मियों में कई क्षेत्रों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

नई दिल्ली | Published: 25 Apr, 2026 | 08:52 AM

India reservoir water levels: देश में बढ़ती गर्मी और कम होती बारिश के बीच पानी का संकट धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता जा रहा है. CWC की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है, जिससे आने वाले समय में जल संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है. केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है.

जलाशयों में घटता पानी स्तर

देश के 166 प्रमुख जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 अरब घन मीटर (BCM) है, लेकिन इस समय इनमें पानी का स्तर घटकर सिर्फ 40.86 फीसदी यानी 74.999 BCM रह गया है. सबसे चिंता की बात यह है कि करीब दो-तिहाई जलाशयों में पानी की मात्रा 50 फीसदी से भी कम है. इनमें से 110 जलाशयों का स्तर आधे से नीचे है, जबकि 78 जलाशयों में पानी 40 फीसदी से भी कम बचा है. सिर्फ 10 ऐसे जलाशय हैं, जहां पानी का स्तर 80 फीसदी से अधिक है, जो स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाता है.

बारिश की कमी ने बढ़ाई परेशानी

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से अब तक देश के 34 फीसदी हिस्सों में सामान्य से कम या बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह कमी जलाशयों के जल स्तर पर सीधा असर डाल रही है. कम बारिश और बढ़ती गर्मी के कारण पानी का उपयोग बढ़ रहा है, जबकि जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं.

दक्षिण भारत में सबसे खराब हाल

दक्षिण भारत में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक नजर आ रही है. यहां के 47 जलाशयों में पानी का स्तर 30 फीसदी से भी नीचे चला गया है. तेलंगाना में सबसे कम 21 फीसदी पानी बचा है, जबकि कर्नाटक में 26 फीसदी. आंध्र प्रदेश में लगभग 40 फीसदी, तमिलनाडु में 39 फीसदी और केरल में 37.5 फीसदी जल भंडारण दर्ज किया गया है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि दक्षिण भारत में पानी की उपलब्धता तेजी से घट रही है.

पूर्वी भारत में भी चिंता बढ़ी

पूर्वी क्षेत्र में भी हालात बहुत बेहतर नहीं हैं. यहां जलाशयों में औसतन 37 फीसदी पानी ही बचा है. असम और पश्चिम बंगाल की स्थिति खास तौर पर चिंताजनक है, जहां जलाशयों में पानी का स्तर क्रमशः 17 फीसदी और 13 फीसदी तक गिर गया है.

हालांकि झारखंड में स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां 54 फीसदी पानी उपलब्ध है, जबकि ओडिशा में 37 फीसदी जल भंडारण दर्ज किया गया है. मेघालय के एकमात्र जलाशय में लगभग 75 फीसदी पानी मौजूद है.

पश्चिमी भारत में थोड़ी राहत

पश्चिमी क्षेत्र में स्थिति बाकी क्षेत्रों के मुकाबले कुछ बेहतर है. यहां के 53 जलाशयों में कुल 48 फीसदी पानी मौजूद है, जो 38.094 BCM क्षमता में से 18.558 BCM है. हालांकि यह भी सामान्य से कम ही माना जा रहा है, लेकिन अन्य क्षेत्रों के मुकाबले यहां थोड़ी राहत है.

मध्य भारत की स्थिति

मध्य भारत के 28 जलाशयों में पानी का स्तर 47.6 फीसदी दर्ज किया गया है. छत्तीसगढ़ में 61 फीसदी पानी उपलब्ध है, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति दर्शाता है. वहीं मध्य प्रदेश में 49 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 44 फीसदी और उत्तराखंड में 33 फीसदी जल भंडारण दर्ज किया गया है.

उत्तर भारत में भी गिर रहा स्तर

उत्तर भारत के 11 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर करीब 44 फीसदी रह गया है. कुल क्षमता 19.836 BCM के मुकाबले यहां 8.743 BCM पानी मौजूद है. यह आंकड़े बताते हैं कि यहां भी स्थिति धीरे-धीरे चिंताजनक हो रही है.

आगे और गिर सकता है जल स्तर

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जलाशयों का स्तर और गिर सकता है. मौसम विभाग ने कई हिस्सों में हीटवेव की संभावना जताई है, जिससे पानी की खपत बढ़ेगी और भंडारण तेजी से कम होगा. अगर समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो गर्मियों में कई क्षेत्रों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

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