देश के बड़े जलाशयों में पानी घटा, 42 प्रतिशत पर पहुंचा स्टोरेज… दक्षिण भारत में हालात गंभीर

देश के 166 जलाशयों की कुल क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है. फिलहाल इनमें केवल 78.481 BCM पानी मौजूद है. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और पानी की मांग भी बढ़ती जा रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Apr, 2026 | 12:07 PM

CWC reservoir storage data: देश में गर्मी जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पानी को लेकर चिंता भी गहराती जा रही है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में इस समय कुल क्षमता का केवल 42.75 प्रतिशत पानी ही बचा है.

हालांकि यह स्तर पिछले साल से 16 प्रतिशत अधिक और पिछले 10 साल के औसत से 27 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन लगातार कम बारिश और बढ़ती गर्मी आने वाले समय के लिए खतरे का संकेत दे रही है.

कुल जल भंडारण की स्थिति

अगर कुल भंडारण की बात करें तो इन 166 जलाशयों की कुल क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है. फिलहाल इनमें केवल 78.481 BCM पानी मौजूद है. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और पानी की मांग भी बढ़ती जा रही है.

बारिश की कमी बना बड़ा कारण

पानी के घटते स्तर के पीछे सबसे बड़ी वजह बारिश की कमी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 मार्च से 16 अप्रैल के बीच देश के 725 जिलों में से करीब 30 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई.

इसके अलावा जनवरी और फरवरी के दौरान भी देश के 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सों में बारिश की कमी रही. लगातार कम होती बारिश का सीधा असर जलाशयों के जल स्तर पर पड़ा है.

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा चिंता

देश के पांच प्रमुख क्षेत्रों में से दक्षिण भारत की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है. यहां के 47 जलाशयों में पानी का स्तर केवल 31.5 प्रतिशत रह गया है, जो पिछले साल के 34 प्रतिशत से भी कम है.

कर्नाटक और तेलंगाना में जल स्तर 30 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुका है. केरल में यह 33 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 40 प्रतिशत और तमिलनाडु में 41 प्रतिशत है. यह स्थिति आने वाले समय में पानी की किल्लत का संकेत दे रही है.

पश्चिमी भारत में स्थिति थोड़ी बेहतर

पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में पानी का स्तर 51.33 प्रतिशत है. गुजरात में यह 56 प्रतिशत तक है, जबकि गोवा और महाराष्ट्र में क्रमशः 45 और 47 प्रतिशत है. हालांकि यहां स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ दबाव बढ़ सकता है.

मध्य भारत में मिला-जुला हाल

मध्य क्षेत्र के 28 जलाशयों में पानी का स्तर 49.6 प्रतिशत है. मध्य प्रदेश में यह 50.8 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 63 प्रतिशत है, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति दिखाता है. लेकिन उत्तर प्रदेश में यह घटकर 45.5 प्रतिशत और उत्तराखंड में केवल 35 प्रतिशत रह गया है.

उत्तर भारत में कुछ राहत

उत्तर भारत के 11 जलाशयों में पानी का स्तर 44 प्रतिशत है, जो पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा है. पंजाब में स्थिति सबसे अच्छी है, जहां जल स्तर 68 प्रतिशत है. हिमाचल प्रदेश में 38 प्रतिशत और राजस्थान में 50 प्रतिशत पानी मौजूद है.

पूर्वी भारत में भी चिंता

पूर्वी क्षेत्र के 27 जलाशयों में जल स्तर केवल 39 प्रतिशत रह गया है. पश्चिम बंगाल में यह 15 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक है. असम में 17 प्रतिशत, ओडिशा में 40 प्रतिशत से कम, बिहार में 35 प्रतिशत और झारखंड में 57 प्रतिशत जल स्तर दर्ज किया गया है.

आगे और गिर सकता है जल स्तर

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में हीटवेव और उमस भरे मौसम की चेतावनी दी है. ऐसे में पानी की मांग और बढ़ेगी, जबकि बारिश की संभावना कम है. इससे जलाशयों का स्तर और तेजी से गिर सकता है.

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