Crop Damage: अचानक हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कई राज्यों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की कटाई और आमदनी पर संकट पैदा हो गया है. खासकर गेहूं, सरसों, चना और सब्जियों जैसी मुख्य फसलें प्रभावित हुई हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह अचानक मौसम बदलाव एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आया है, जिसने उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि लाया. प्रभावित राज्यों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फसल पर इस समय अधिक नमी का असर दानों की गुणवत्ता कम कर सकता है, जिससे किसान मंडियों में उचित कीमत नहीं ले पाएंगे.
बात अगर राजस्थान की करें तो जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, अजमेर, चूरू और सीकर जैसे जिलों में ओलावृष्टि से व्यापक नुकसान हुआ. गेहूं, सरसों, इसबगोल और जीरा की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. कई जगह खेतों पर ओलों की मोटी परत जमा हो गई, और तैयार फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं. वहीं, लगभग 1,22,000 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है. केवल उत्तर महाराष्ट्र के जिले, जैसे नासिक और अहमदनगर, में ही 64,000 हेक्टेयर से अधिक नुकसान हुआ. नासिक, जलगांव, अहल्यानगर और बुलढाणा जैसे जिलों में अंगूर, आम, प्याज और केले जैसी बागवानी फसलों को भारी नुकसान हुआ है.
उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में 4,000 हेक्टेयर फसल चौपट
इसी तरह उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक खेत प्रभावित हुए हैं. तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं और सरसों की फसलें बर्बाद कर दी हैं. किसानों को डर है कि अधिक नमी के कारण दानों का रंग बदल सकता है और गुणवत्ता घट सकती है. इसी तरह हरियाणा के हिसार और जींद जैसे क्षेत्रों में खड़े गेहूं और सरसों की फसलें ओलावृष्टि से दब गई हैं. पंजाब में 4 अप्रैल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जो गंभीर मौसम की संभावना को दर्शाता है. वहीं, बिहार, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से भी स्थानीय स्तर पर फसल नुकसान की खबरें आई हैं.
30 फीसदी से 40 फीसदी तक फसल चौपट
रूरल वॉयस की रिपोर्ट्स के अनुसार कई जगहों पर फसलें 30 फीसदी से 40 फीसदी तक नष्ट हुई हैं. किसानों और व्यापारियों का कहना है कि 2026 में गेहूं की उत्पादन मात्रा पिछले साल से ज्यादा हो सकती है, लेकिन शुरुआती अनुमान से कम रहने की संभावना है. मार्च की शुरुआती गर्मी की लहर और पिछले दो हफ्तों की लगातार बेमौसमी बारिश व ओलावृष्टि ने फसलों को पहले ही प्रभावित किया है.
उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और ओलावृष्टि जारी रहने की संभावना
आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के कारण 4 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और ओलावृष्टि जारी रहने की संभावना है. इस सप्ताह बाद में एक और सिस्टम इस क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिसका चरम प्रभाव 7 और 8 अप्रैल को होने की संभावना है. कश्मीर घाटी में भी भारी बारिश की संभावना है. मध्य, पूर्व और देश के अन्य हिस्सों में 8 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि होने की संभावना है. अधिकांश क्षेत्रों में दिन का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की उम्मीद है, जो गर्मी से राहत देगा लेकिन खड़ी फसलों के लिए खतरा बरकरार रखेगा.