रासायनिक खाद कम करने की दिशा में बड़ा कदम, IPL Biologicals ने शुरू की नई यूनिट

गुजरात के वडोदरा में 12 एकड़ में फैली इस अत्याधुनिक यूनिट का निर्मित क्षेत्र करीब 2 लाख वर्ग फीट है. इसके शुरू होने से कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 7,000 किलोलीटर प्रतिवर्ष हो गई है. कंपनी के अनुसार प्लांट में पूरी तरह ऑटोमेटेड उत्पादन प्रणाली लगाई गई है, जिससे बहुत कम मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ेगी.

नोएडा | Published: 21 May, 2026 | 02:34 PM

आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड ने गुजरात के वडोदरा में अपनी अत्याधुनिक और cGMP मानकों वाली बायोलॉजिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया. कंपनी ने कहा कि यह निवेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को 50 प्रतिशत तक कम करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की पहल को मजबूत करेगा. उद्घाटन समारोह में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर और पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह समेत वैज्ञानिक, नीति निर्माता, वितरक और प्रगतिशील किसान शामिल हुए. कंपनी के अनुसार यह नई यूनिट भारत के एग्री-बायोलॉजिकल सेक्टर को मजबूत करेगी और किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ बेहतर उत्पादन बनाए रखने में मदद देगी.

आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड के अध्यक्ष हर्ष वर्धन भगचंदका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रासायनिक उर्वरकों  के इस्तेमाल को 50 प्रतिशत तक कम करने की अपील मिट्टी, स्वास्थ्य और देश के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि वडोदरा में शुरू की गई नई यूनिट इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में कंपनी का बड़ा कदम है, जहां किसानों को पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक जैविक कृषि समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे.

उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी

गुजरात के वडोदरा में 12 एकड़ में फैली इस अत्याधुनिक यूनिट का निर्मित क्षेत्र करीब 2 लाख वर्ग फीट है. इसके शुरू होने से कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 7,000 किलोलीटर प्रतिवर्ष हो गई है. कंपनी के अनुसार प्लांट में पूरी तरह ऑटोमेटेड उत्पादन प्रणाली लगाई गई है, जिससे बहुत कम मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ेगी. यह यूनिट जीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम पर आधारित है, जिसमें पूरे अपशिष्ट जल को रिसाइकिल किया जाता है. साथ ही यहां 500 किलोवॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा, जिससे टिकाऊ और जिम्मेदार मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा.

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया

कंपनी ने बताया कि यह प्लांट cGMP, OHSAS और ISO 9001:2015 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है. साथ ही इसमें SCADA आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है. प्लांट को IMO, इंडोसर्ट और OMRI जैसे ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन  भी मिले हैं, जिससे यहां बने उत्पादों को वैश्विक बाजारों में भी भेजा जा सकेगा. आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड के ब्रांड एंबेसडर और पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय कृषि के लिए रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को आधा करने का स्पष्ट लक्ष्य दिया है और IPL Biologicals किसानों को इसके लिए आधुनिक जैविक समाधान उपलब्ध करा रही है. उन्होंने कहा कि किसान देश के असली चैंपियन हैं और यह नई यूनिट उन्हें बेहतर जैविक उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद करेगी.

स्वास्थ्य से जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे

कंपनी के अनुसार इस प्लांट में नई पीढ़ी के बायोफर्टिलाइजर, बायोपेस्टिसाइड और फसल स्वास्थ्य से जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिससे किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि समाधान मिल सकेंगे. आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड के सीएमडी महेश भगचंदका ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को 50 प्रतिशत तक कम करना सिर्फ पर्यावरण की जरूरत नहीं, बल्कि छोटे किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि अधिक रासायनिक खाद की जगह उच्च गुणवत्ता वाले बायोफर्टिलाइजर अपनाने से किसानों की लागत कम होगी और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी. यह नई यूनिट किसानों तक आधुनिक वैज्ञानिक और जैविक कृषि समाधान पहुंचाने का काम करेगी.

उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश

उन्होंने कहा कि कंपनी जैविक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही है और सरकार से उद्योग के अनुकूल नीतियां लागू करने की उम्मीद करती है. उनका कहना है कि खेती में इस बदलाव को सफल बनाने के लिए ऐसी नीतियां जरूरी हैं, जो किसानों को जैविक उत्पाद अपनाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करें. साथ ही, घरेलू उत्पादन बढ़ने और सरकारी प्रोत्साहन मिलने से देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को फायदा होगा.

बायो-पेस्टिसाइड का उत्पादन

भारत में नए बायोलॉजिकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू होने से देश में बायो-फर्टिलाइजर और बायो-पेस्टिसाइड का उत्पादन बढ़ रहा है. इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले जैविक कृषि उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे. साथ ही किसान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर पाएंगे, जिससे सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ भी घटेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी.

बायो-फर्टिलाइजर के फायदे

विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत सुधरेगी, फसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और लोगों के स्वास्थ्य की भी सुरक्षा होगी. माइक्रोबियल फॉर्मूलेशन और बायो-फर्टिलाइजर मिट्टी में पोषक तत्वों को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि लगातार रासायनिक खाद के उपयोग से होने वाली मिट्टी की खराबी को भी कम करते हैं. इसके अलावा, जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और किसानों की लागत घटाने में भी मदद मिलेगी.

Topics: