महंगाई से बिगड़ा रसोई का बजट, जुलाई में वेज थाली 4 फीसदी और नॉन-वेज 9 फीसदी हुई महंगी

Food Inflation India: जुलाई में घर की रसोई का खर्च बढ़ा है. क्रिसिल के अनुसार, शाकाहारी थाली 4 फीसदी और मांसाहारी थाली 9 फीसदी महंगी हुई. प्याज, खाद्य तेल और LPG के बढ़े दाम इसकी मुख्य वजह रहे, जबकि सस्ते आलू और टमाटर ने कुछ राहत दी.

नोएडा | Published: 8 Aug, 2026 | 02:49 PM

Thali Cost July 2026: महंगाई का असर अब घर की रसोई पर भी साफ दिखाई दे रहा है. जुलाई में घर पर तैयार होने वाले खाने की लागत बढ़ गई. क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल पहले की तुलना में जुलाई में औसत शाकाहारी थाली करीब 4 फीसदी महंगी हुई, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. प्याज, खाद्य तेल और LPG की बढ़ी कीमतों ने खाना बनाने का खर्च बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई.

कितनी महंगी हुई शाकाहारी और मांसाहारी थाली?

क्रिसिल के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में एक सामान्य शाकाहारी थाली की औसत लागत बढ़कर 29.1 रुपये हो गई. पिछले साल जुलाई में यही थाली करीब 28.1 रुपये की थी. वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत में ज्यादा तेजी देखने को मिली. इसकी औसत लागत पिछले साल के 53.5 रुपये से बढ़कर जुलाई में 58.3 रुपये हो गई. यानी नॉन-वेज थाली पर महंगाई का असर ज्यादा रहा.

प्याज ने बढ़ाया रसोई का खर्च

थाली की लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में प्याज की बढ़ी कीमत शामिल रही. जुलाई में प्याज के दाम पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा रहे. महाराष्ट्र में मार्च और अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने देर से तैयार होने वाली प्याज की फसल और उपलब्ध स्टॉक को नुकसान पहुंचाया. इसके बाद बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया. क्रिसिल इंटेलिजेंस के मुताबिक, रबी प्याज की उपलब्धता सीमित रहने और खरीफ प्याज की आवक में देरी होने की आशंका के कारण आने वाले समय में प्याज के भाव ऊंचे रह सकते हैं.

खाद्य तेल और LPG भी हुए महंगे

रसोई के खर्च पर सिर्फ सब्जियों की कीमतों का असर नहीं पड़ा. खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल भी जुलाई में सालाना आधार पर करीब 11 फीसदी महंगा रहा. वहीं LPG सिलेंडर की कीमत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई पर असर और ऊर्जा लागत बढ़ने को भी इसकी वजह माना जा रहा है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से परिवहन और आयात का खर्च बढ़ा है. इसका असर सामान को बाजार तक पहुंचाने और पैकेजिंग की लागत पर भी पड़ा है.

आलू-टमाटर ने थोड़ी राहत दी

जहां प्याज और तेल ने रसोई का बजट बढ़ाया, वहीं आलू और टमाटर की कम कीमतों ने कुछ राहत जरूर दी. जुलाई में आलू के दाम सालाना आधार पर 12 फीसदी कम रहे, जबकि टमाटर की कीमत में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई. आलू की रबी फसल का उत्पादन बढ़ने और खेती का रकबा ज्यादा रहने से बाजार में इसकी सप्लाई बेहतर रही. इसी वजह से कीमतों पर दबाव कम रहा.

आगे फिर बढ़ सकती हैं कुछ सब्जियों की कीमतें

क्रिसिल का अनुमान है कि आने वाले समय में आलू के महंगे कोल्ड-स्टोरेज स्टॉक बाजार में आने से इसके दाम बढ़ सकते हैं. वहीं टमाटर की कीमतें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं, लेकिन सितंबर से खरीफ फसल की आवक में देरी और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग के कारण इसके भाव में तेजी आ सकती है. कुल मिलाकर जुलाई में प्याज, खाद्य तेल और LPG की महंगाई ने घर की थाली का खर्च बढ़ाया है. आने वाले महीनों में सब्जियों की नई फसल की आवक और त्योहारी मांग यह तय करेगी कि रसोई के बजट पर दबाव कम होता है या महंगाई और बढ़ती है.

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