कश्मीर के किसानों को धान में बड़ा फायदा! 9 हजार रुपये क्विंटल तक बिक रही नई किस्म
कश्मीर के धान किसानों के लिए नई खुशबूदार किस्म उम्मीद की नई वजह बनी है. शालीमार सुगंध से 8-8.5 टन प्रति हेक्टेयर तक पैदावार मिल रही है. खास बात यह है कि किसानों को बाजार में 8,000-9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव भी मिला है.
Kashmir Paddy Variety: कश्मीर घाटी के धान किसानों के लिए नई खुशबूदार धान की किस्म बेहतर कमाई का जरिया बनती दिख रही है. शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के अनुसार, माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स, खुदवानी ने शालीमार सुगंध नाम की धान की किस्म विकसित की है. इसे काशुर बासमती के नाम से भी जाना जा रहा है. बिजनेसलाइन के अनुसार, इस किस्म से किसानों को प्रति हेक्टेयर 8 से 8.5 टन तक उपज मिल रही है. वहीं, बाजार में किसानों को इसके लिए 8,000 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव भी मिला है. ऐसे में यह किस्म पारंपरिक धान के मुकाबले किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता रखती है.
2021 में शुरू हुआ था नई किस्म पर काम
बिजनेसलाइन के अनुसार, माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स, खुदवानी में इस नई धान की किस्म को विकसित करने का काम साल 2021 में शुरू किया गया था. खेतों में इसके सफल परीक्षण के बाद साल 2024 से घाटी के किसानों को इसके प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाने लगे. संस्थान के प्रोफेसर और एसोसिएट डायरेक्टर नजीब-उल-रहमान सोफी के अनुसार, यह किस्म कश्मीर घाटी की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है. इसकी खासियत इसकी खुशबू और अच्छी उत्पादकता है, जिसके कारण किसानों के बीच इसका आकर्षण बढ़ रहा है.
8 से 8.5 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज
नई किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतर पैदावार है. परीक्षणों में शालीमार सुगंध से प्रति हेक्टेयर 8 से 8.5 टन तक धान की उपज दर्ज की गई है. इससे किसानों को कम क्षेत्र में भी अच्छी मात्रा में उत्पादन हासिल करने का मौका मिल सकता है. इसके अलावा खुशबूदार चावल होने की वजह से इसे बाजार में सामान्य धान से अलग पहचान मिलने की उम्मीद है. वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रमाणित बीजों की उपलब्धता बढ़ने और किसानों के बीच इसका अनुभव सामने आने के साथ इसकी खेती का रकबा भी बढ़ सकता है.
किसानों को 9 हजार रुपये क्विंटल तक मिला भाव
नई किस्म किसानों के लिए सिर्फ उपज के लिहाज से ही नहीं, बल्कि बाजार भाव के मामले में भी फायदेमंद साबित हो रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुलगाम के किसान फैयाज अहमद के अनुसार, उन्होंने इस चावल को 8,000 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव पर बेचा. बेहतर कीमत मिलने से किसानों को पारंपरिक धान की तुलना में अधिक कमाई की उम्मीद है. हालांकि, भविष्य में इस किस्म की सफलता इसकी बाजार मांग, उत्पादन और प्रमाणित बीजों की आसान उपलब्धता पर निर्भर करेगी.
GI टैग वाले बासमती क्षेत्र से बाहर है कश्मीर घाटी
कश्मीर घाटी में इस खुशबूदार धान का विकास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घाटी मान्यता प्राप्त बासमती GI टैग वाले भौगोलिक क्षेत्र में शामिल नहीं है. GI क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 30 जिले और जम्मू-कश्मीर के जम्मू, कठुआ व सांबा जिले शामिल हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में करीब 46,130 हेक्टेयर क्षेत्र में मान्यता प्राप्त बासमती की खेती होती है, जो मुख्य रूप से जम्मू क्षेत्र में केंद्रित है. ऐसे में कश्मीर घाटी के लिए विकसित यह स्थानीय खुशबूदार किस्म किसानों को अलग बाजार पहचान और बेहतर दाम दिलाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है.