खेती के बढ़ते खर्च से किसानों की टूट रही कमर, किसान बोले- गन्ना बकाया 230 करोड़ जारी करे सरकार
किसान मजदूर मोर्चा ने यूरिया की कमी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जबरदस्ती नैनो यूरिया थोपने की नीति को तुरंत बंद किया जाए. इसके अलावा गन्ना किसानों का बकाया 230 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग की गई है. समाधान नहीं होने पर 18 मई को धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है.
Punjab Farmers News: किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर) के आह्वान पर बुलाई गई बैठक में किसानों के मुद्दों पर मंथन के बाद केंद्र और राज्य सरकार से समाधान की मांग की गई है. बैठक में कहा गया है कि खेती का बढ़ते खर्च से किसानों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. किसानों को वित्तीय जरूरत पूरी करने के लिए सहकारी समितियों से लोन राशि बढ़ाने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन फिर इस फैसले को वापस ले लिया गया है, जिससे किसानों की तुंरत पैसे की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है. वहीं, यूरिया की कमी को लेकर गंभीर संकट का इशारा करते हुए चिंता व्यक्त की है. किसान नेताओं ने जबरदस्ती नैनो यूरिया थोपने की नीति को तुरंत बंद किया जाए. वहीं, गन्ना बकाया 230 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की गई है.
चंडीगढ़ के किसान भवन में मनजीत सिंह राय की अध्यक्षता में और मलकीत सिंह गुलामी वाला की सहअध्यक्षता में बैठक में कई किसान संगठनों के नेताओं ने हिस्सा लिया और किसानों के सामने आ रही गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा कई अहम फैसले लिए गए. बैठक में यह बताया गया कि सरकार की ओर से पहले सहकारी सभाओं में किसानों की कर्ज सीमा बढ़ाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन अब उस पर रोक लगा दी गई है. मोर्चा ने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण किसानों के खर्च कई गुना बढ़ गए हैं, इसलिए कर्ज सीमा को तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए.
नैनो उत्पाद थोपना बंद हो और नुकसान मुआवजा जारी हो
किसान नेताओं ने यूरिया की कमी को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई. मोर्चा ने चेतावनी दी कि धान के सीजन से पहले यह संकट और गहरा सकता है. मांग की गई कि यूरिया की कमी का तुरंत स्थायी समाधान किया जाए और किसानों पर जबरदस्ती नैनो यूरिया थोपने की नीति को तुरंत बंद किया जाए. किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ से संबंधित मुद्दों पर भी जोर दिया गया. किसानों को बकाया मुआवजा तुरंत देने की मांग करते हुए बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां समय रहते की जाएं.
इन मुद्दों पर एकजुट होंगे किसान
- भारत-अमेरिका समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखा जाए
- बिजली बोर्ड के निजीकरण का फैसला तुरंत वापस लिया जाए
- बीज एक्ट को तुरंत रद्द किया जाए
- जीएम बीजों को मंजूरी देने या बढ़ावा देने की नीति समाप्त की जाए
- मंडियों में लिफ्टिंग की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए
- मोहाली में गमाडा द्वारा लैंड पूलिंग के नाम पर किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण को रोका जाए
किसानों का 230 करोड़ रुपये गन्ना का बकाया जारी करे सरकार
किसान नेताओं ने कहा कि गन्ने का बकाया 230 करोड़ रुपये तुरंत किसानों को जारी किया जाए. बढ़ती महंगाई से परेशान किसानों को बढ़ाकर राशि वितरित की जाए. इसके अलावा किसानों ने केहा कि “पेनल्टी” के नाम पर की गई कटौतियों को वापस किया जाए. आने वाले सीजन से पहले बिजली संकट से बचने के लिए पूरा प्रबंध सरकार करे. बिजली कनेक्शन शिफ्ट करने से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान किया हो और ट्यूबवेल मोटरों के लिए 1200 रुपये प्रति हॉर्स पावर के हिसाब से राहत दर लागू की जाए और VDS योजना जारी रखी जाए. जबकि, किसानों की जरूरत के अनुसार बिजली लोड बढ़ाने की मांग की गई.
18 मई को धरना और विरोध प्रदर्शन का ऐलान
किसान नेताओं ने कहा कि 18 मई को जिला स्तर पर सहकारी सभाओं के डीआरओ (DRO) कार्यालयों के बाहर दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक एक दिन का धरना दिया जाएगा. जिन क्षेत्रों में खाद और कर्ज सीमा की समस्या ज्यादा है, वहां स्थानीय किसान संगठन अलग से विरोध प्रदर्शन भी करेंगे. वहीं, किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों की इन जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं करती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा.