कृषि से जुड़े कानूनों और नीतियों के खिलाफ किसान संगठनों की हुंकार, 5 फरवरी को मंत्रियों के घेराव का ऐलान

किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में कई किसान संगठनों से जुड़े किसानों और मजदूरों ने पंजाब ने केंद्रीय और राज्य की निजीकरण की नीतियों के विरोध में स्मार्ट बिजली मीटर हटाकर नजदीकी पावर प्लांट और बिजली दफ्तरों में जमा कराए हैं. बिजली संशोधन बिल समेत अन्य नीतियों के खिलाफ सरकारी परिसरों में विरोध प्रदर्शन किया है.

नई दिल्ली | Updated On: 22 Jan, 2026 | 02:15 PM

कृषि संबंधी क्षेत्रों के लिए नए कानूनों और पॉलिसी लाने का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं. किसान मजदूर मोर्चा भारत चैप्टर पंजाब के नेतृत्व में आज पंजाब के कई शहरों में किसानों ने बिजली मीटर उतारकर नजदीकी पॉवर प्लांट या बिजली विभाग के दफ्तरों में जमा कराए हैं. किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली संशोधन बिल ला रही है, बीज कानून समेत कई नीतियों को कॉरपोरेट को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है, जिनका किसान विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आगामी 5 फरवरी को पूरे पंजाब में मंत्रियों और नेताओं के घरों और दफ्तरों का घेराव किया जाएगा.

केंद्रीय और राज्य की नीतियों के खिलाफ कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन

किसान मजदूर मोर्चा भारत चैप्टर पंजाब ने प्राइवेटाइजेशन की नीतियों के विरोध में आज 22 जनवरी 2026 को पंजाब में स्मार्ट मीटर हटाकर आसपास के पावर प्लांट में जमा कराए हैं. आह्वान पर किसान संगठन से जुड़े किसानों ने अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, तरनतारन, मोगा समेत करीब 20 शहरों में स्मार्ट मीटर उतारकर बिजली दफ्तरों में जमा कराए हैं और बिजली बिल संशोधन बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है. नीतियों के खिलाफ किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब, BKU क्रांतिकारी, BKU दोआबा, BKU आजाद, BKU बेहरामके, किसान मजदूर हितकारी सभा, BKJU भनेरी, BKMU संगठन ने आवाज उठाई है.

ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर उतारकर बिजली दफ्तरों में जमा कराए हैं.

बिजली संशोधन बिल का विरोध कर रहे किसान संगठन

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली संशोधन विधेयक ला रही है. इसके लागू होते ही किसानों पर बिजली बिल का बोझ बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि बिजली का विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए केंद्र को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. राज्य की ओर से किसानों को मिल रही बिल छूट को भी हटा दिया जाएगा.

किसान केंद्र के इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट का विरोध कर रहे हैं. वे इसे किसान विरोधी बता रहे हैं. उनका कहना है कि इससे भारतीय बिजली सिस्टम का प्राइवेटाइजेशन और सेंट्रलाइजेशन होगा. जो किसानों के लिए बेहद घातक होगा. किसानों को चिंता है कि बिजली बिल पास होने से प्राइवेट सेक्टर और केंद्र के हाथों में यह क्षेत्र चला जाएगा. उसके बाद बिजली दरों में मनमाने तरीके से बढ़ोत्तरी होगी और राज्यों की ओर से दी जा रही सब्सिडी या अन्य छूट योजनाओं को लागू नहीं किया जा सकेगा.

राज्य और केंद्र की कई नीतियों पर किसानों की नाराजगी

किसान मजदूर मोर्चा की ओर से कहा गया कि पंजाब के लोगों ने आज वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन, वर्ल्ड बैंक, मॉनेटरी फंड जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की कॉर्पोरेट घरानों की समर्थक नीतियों के तहत भारतीय लोगों के खिलाफ लाए जा रहे कानूनों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया है. मोदी सरकार जनविरोधी काले कानून ला रही है. वहीं, राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषयो जैसे बिजली, बीज मंडी और रिसर्च सेक्टर, पानी, शिक्षा, कृषि सेक्टर में जबरदस्ती कानून बनाकर केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीणों पर हमला कर रही है.

5 फरवरी को मंत्रियों और नेताओं के घरों का घेराव कर आंदोलन होगा

सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि पंजाब की भगवंत मान सरकार केंद्र की मोदी सरकार का विरोध करने के बजाय, पंजाब में उठ रहे आंदोलनों को सोशल मीडिया और दूसरे तरीकों से बदनाम करने और दबाने में लगी हुई है. ऑनलाइन बिजनेस, बड़े शॉपिंग मॉल, छोटे बिजनेसमैन और रेहड़ी-पटरी वालों की पॉलिसी के तहत वे धीरे-धीरे शहरों का बिजनेस भी खत्म कर रहे हैं. कानून-व्यवस्था की हालत नाजुक है, जिससे हर कोई परेशान है. इसे सुधारने के लिए लोगों को पंजाब और केंद्र की भगवंत मान सरकार के खिलाफ बड़े संघर्षों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 5 फरवरी को पंजाब के MLA और मंत्रियों के घरों का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा.

Published: 22 Jan, 2026 | 02:08 PM

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