Wheat Mandi Rates: प्राकृतिक खेती से तैयार फसलों को हिमाचल प्रदेश सरकार एमएसपी की तुलना में लगभग दोगुना भाव दिया जा रहा है. राज्य सरकार ने प्राकतिक तरीके से उगाई जा रही मक्का का भाव में बढ़ाया है. जबकि, हल्दी की खेती करने वाले किसानों को भी 9 हजार रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है. सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए फसलों के भाव बढ़ाकर दे रही है.
गेहूं किसानों को एमएसपी से दोगुना भाव (Wheat Rate)
प्राकृतिक खेत को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने तथा इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से किए गए प्रयास काफी अच्छे परिणाम ला रहे हैं. प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती से उगाई गए गेहूं को 60 रुपये प्रति किलो यानी 6000 हजार रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है. वहीं, सामान्य तरीके से उगाए गए गेहूं के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इस हिसाब से हिमाचल के किसानों को प्राकृतिक तरीके से उगाए गए गेहूं के लिए एमएसपी की तुलना में दोगुना भाव मिल रहा है.
मक्का के लिए किसानों को मिला 4000 रुपये
राज्य सरकार ने मक्का किसानों के लिए बढ़ाकर भाव देने की घोषणा की है और मक्का के लिए 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद की जा रही है. यानी प्राकृतिक तरीके से उगाई गई मक्का फसल (Maize Mandi Rates) के लिए 4000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव किसानों को दिया जा रहा है. वहीं, सामान्य तरीके से उगाई गई मक्का के लिए केंद्र सरकार ने 2400 प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है. इस हिसाब से हिमाचल के किसानों को मक्का का भाव अधिक मिल रहा है.
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हल्दी किसानों को मिल रहा 9000 रुपये
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों के लिए एमएसपी की तुलना में अधिक भाव दे रही है. इसी तरह राज्य सरकार ने प्राकृतिक तरीके से उगाई गई कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो यानी 9000 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद कर रही है. प्राकृतिक उपज को मिल रहे अधिक भाव से किसानों में उत्साह है.
हिमाचल में 38,437 हेक्टेयर में किसान कर रहे प्राकृतिक खेती
हिमाचल में प्राकृतिक खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. हिमाचल प्रदेश में लगभग 38,437 हेक्टेयर जमीन पर प्राकृतिक खेती (Natural Farming Acreage) की जा रही है. राज्य के कृषि विभाग के अनुसार इस रकबे पर अब तक 2,22,893 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती के तरीके अपना चुके हैं, जो राज्य के 3,584 पंचायतों में फैले हुए हैं.