कैबिनेट ने चना-मसूर की MSP खरीदी को दी मंजूरी, गेहूं खरीद की नई तारीख का हुआ ऐलान
Madhya Pradesh Wheat Purchase : मध्य प्रदेश सरकार ने 9 अप्रैल से गेहूं, चना और मसूर की सरकारी खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया है. इस बार छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिलेगी. गेहूं का MSP 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस शामिल है. चना और मसूर की खरीदी भी MSP पर होगी.
MP News: मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है. सरकार ने रबी फसलों की खरीदी प्रक्रिया को और आसान और लाभकारी बना दिया है. अब गेहूं, चना और मसूर की खरीदी 9 अप्रैल से शुरू होगी, ताकि किसान अपनी मेहनत की कमाई समय पर पा सकें और फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित हो. इस कदम से छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता भी मिलेगी, जिससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद होगी.
चना और मसूर की खरीदी MSP पर
किसानों को राहत देने के लिए इस बार चना और मसूर की खरीदी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी. चने का MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल और मसूर का MSP 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. सरकार ने चने का 25 प्रतिशत और मसूर की पूरी फसल का उपार्जन करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए कुल 3,174 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है.
उपार्जन केंद्रों और बोनस की व्यवस्था
मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि राज्य में 3,627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, ताकि किसानों को खरीदी में कोई परेशानी न हो. गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी शामिल है. इसके अलावा खरीदी केंद्रों पर बारदाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूरी की गई हैं.
कैबिनेट बैठक में हुए महत्वपूर्ण निर्णय
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किसानों के हित में गेहूं के उपार्जन के बाद अब चना और मसूर के उपार्जन का भी निर्णय आज कैबिनेट में लिया गया है। इसके लिए ₹3,174 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।🔹कैबिनेट मंत्री श्री @ChetanyaKasyap@DrMohanYadav51 @minmpkrishi… pic.twitter.com/WgIMz2tv8d
— Jansampark MP (@JansamparkMP) April 7, 2026
छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगी प्राथमिकता
राज्य सरकार ने इस बार निर्णय लिया है कि खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत छोटे और सीमांत किसानों से होगी. इससे उन्हें तुरंत फसल का भुगतान मिल सकेगा और बड़े किसानों के दबाव के बिना उनका हक सुरक्षित रहेगा. इस साल करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3.5 लाख अधिक है.
मंडी शुल्क और भंडारण में राहत
सरकार ने किसानों की मदद के लिए फैसला लिया है कि फसल खरीदते समय मंडी का शुल्क और अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. खरीदी गई फसल को नेफेड के जरिए सुरक्षित रखा जाएगा और इसके लिए गोदामों की पूरी व्यवस्था की गई है. इससे किसानों को अपने खेत की फसल का सही दाम मिलेगा और उन्हें बाजार में कम कीमत मिलने की चिंता नहीं रहेगी.
किसान कल्याण और सिंचाई योजनाओं पर जोर
किसानों के हित में सरकार ने सिंचाई योजनाओं पर भी जोर दिया है. मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध से भानपुरा तहसील तक लिफ्ट इरीगेशन योजना को मंजूरी दी गई है. इस योजना से करीब 3,500 हेक्टेयर भूमि और 1,358 परिवारों को लाभ मिलेगा. नई और पुरानी सिंचाई योजनाओं के पूरा होने के बाद सिंचित भूमि का क्षेत्र लगभग 77 प्रतिशत तक पहुँच जाएगा.
मध्य प्रदेश सरकार के ये निर्णय न केवल किसानों के हित में हैं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि उत्पादन को भी मजबूती देंगे. गेहूं, चना और मसूर की सरकारी खरीदी से किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और बाजार के कम दामों से राहत मिलेगी.