रिकॉर्ड उत्पादन के बीच MP में अब 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदेगी सरकार, किसानों को मिलेगा पूरा MSP

मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जा रही है. इसके साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है. यानी किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिल रहा है. इससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

नई दिल्ली | Updated On: 24 Apr, 2026 | 08:15 AM

Madhya Pradesh wheat procurement 2026: मध्य प्रदेश में इस साल गेहूं की अच्छी पैदावार के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पहले जहां राज्य में गेहूं खरीदने का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, अब इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है.

इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा. अब उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए भागदौड़ या चिंता नहीं करनी पड़ेगी और ज्यादा से ज्यादा गेहूं सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी. यानी किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिलने की संभावना और बढ़ गई है.

बढ़ते उत्पादन के बीच लिया गया बड़ा फैसला

इस साल मध्य प्रदेश में गेहूं का उत्पादन अच्छा रहा है. खेतों में भरपूर पैदावार होने के कारण किसानों को चिंता थी कि अगर खरीदी की सीमा कम रही, तो उनकी उपज का बड़ा हिस्सा समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पाएगा.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार से खरीदी की सीमा बढ़ाने का आग्रह किया. उन्होंने मीडिया को यह भी बताया कि अगर सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो कई किसान अपनी मेहनत का सही मूल्य पाने से वंचित रह सकते हैं. केंद्र सरकार ने इस मांग को गंभीरता से लिया और तुरंत मंजूरी देते हुए नया लक्ष्य तय कर दिया.

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह फैसला किसानों की मेहनत का सम्मान है. उन्होंने नरेंद्र मोदी और प्रह्लाद जोशी का धन्यवाद करते हुए कहा कि इतनी चुनौतियों के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के हित को सबसे ऊपर रखा है.

मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और आगे भी उनके फायदे के लिए हर जरूरी कदम उठाती रहेगी.

किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

खरीदी का लक्ष्य बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा. अब वे बिना किसी दबाव के अपनी फसल बेच सकेंगे. पहले यह डर रहता था कि तय सीमा पूरी हो जाएगी और किसानों को बाजार में कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा.

अब 100 लाख मीट्रिक टन तक खरीदी होने से ज्यादा से ज्यादा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा. इससे बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी और किसान सीधे सरकार को अपनी फसल बेच सकेंगे.

रिकॉर्ड पंजीयन और तेज खरीदी प्रक्रिया

इस साल गेहूं बेचने के लिए बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीकरण कराया है. करीब 19.04 लाख किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए अपना नाम दर्ज कराया है, जो पिछले साल से करीब 3 लाख ज्यादा है.

अब तक 2.21 लाख किसानों से 95.17 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है. इसमें से 75.57 लाख क्विंटल गेहूं का परिवहन भी हो चुका है. सरकार ने 1.06 लाख किसानों को 1091.33 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया है. ये आंकड़े बताते हैं कि इस बार खरीदी प्रक्रिया तेजी से चल रही है और किसानों को समय पर भुगतान भी मिल रहा है.

समर्थन मूल्य और बोनस का फायदा

प्रदेश में इस बार गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जा रही है. इसके साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है. यानी किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिल रहा है. इससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

बारदाना और व्यवस्था की चुनौती का समाधान

खरीदी के दौरान बारदाना (बोरी) की कमी एक बड़ी समस्या बन सकती थी, लेकिन सरकार ने पहले ही इसके समाधान की व्यवस्था कर ली है. जूट बैग के साथ-साथ पीपी बैग और अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि फिलहाल खरीदी के लिए पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है, जिससे प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी.

चरणबद्ध खरीदी से छोटे किसानों को राहत

राज्य सरकार ने खरीदी को चरणबद्ध तरीके से करने का फैसला लिया है. पहले छोटे किसानों से गेहूं खरीदा जाएगा, उसके बाद मध्यम और फिर बड़े किसानों की बारी आएगी. इसका मकसद यह है कि छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिले और उन्हें अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र पर पड़ेगा. जब किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलेगा, तो उनकी आय बढ़ेगी. इससे गांवों में खर्च बढ़ेगा, छोटे व्यापारियों को फायदा होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. यानी यह निर्णय खेती के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा.

Published: 24 Apr, 2026 | 08:03 AM

Topics: