महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना पर बड़ी कार्रवाई, 68 लाख खाते हुए बंद… जानें क्या है बड़ी वजह

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक दिलचस्प मामला भी सामने आया. एक मराठी भाषा के सवाल की वजह से करीब 24 लाख लाभार्थियों को गलती से सरकारी कर्मचारी मान लिया गया था. बाद में जब जांच की गई, तो इनमें से लगभग 20 लाख खातों को सही पाया गया.

नई दिल्ली | Published: 2 Apr, 2026 | 07:29 AM

Maharashtra Ladki Bahin scheme: महाराष्ट्र सरकार की चर्चित और महत्वाकांक्षी “लाडकी बहिन योजना” इन दिनों एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. यह योजना लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा बनकर सामने आई थी, लेकिन अब इसमें सख्ती भी बढ़ा दी गई है. सरकार ने साफ कर दिया है कि जो लाभार्थी तय समय पर e-KYC नहीं कराएंगे, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा. इसी कार्रवाई के तहत करीब 68 लाख खातों को बंद कर दिया गया है, जिससे योजना से जुड़े लोगों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सरकार ने सभी लाभार्थियों के लिए e-KYC अनिवार्य कर दिया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना का लाभ सही लोगों तक ही पहुंचे. लेकिन बड़ी संख्या में लोग समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए. इसी वजह से सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए 68 लाख खातों को निष्क्रिय कर दिया.

अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत पहले कुल 2.43 करोड़ खाते पंजीकृत थे. लेकिन इस कार्रवाई के बाद सक्रिय खातों की संख्या घटकर करीब 1.75 करोड़ रह गई है. यानी लगभग एक चौथाई लाभार्थी फिलहाल योजना से बाहर हो गए हैं.

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आई थीं. कुछ ऐसे लोग भी योजना का फायदा उठा रहे थे जो इसके पात्र ही नहीं थे. इनमें पुरुष और सरकारी कर्मचारी तक शामिल पाए गए. ऐसे मामलों को रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाया गया.

यही वजह है कि e-KYC को अनिवार्य बनाया गया, ताकि हर लाभार्थी की पहचान सही तरीके से हो सके और फर्जी या अपात्र लोगों को बाहर किया जा सके.

1500 रुपये की मदद और बड़ा बजट

लाडकी बहिन योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि सीधे उनके खातों में भेजी जाती है, जिससे उन्हें अपने दैनिक खर्चों में मदद मिलती है.

राज्य सरकार इस योजना पर हर महीने करीब 3700 करोड़ रुपये खर्च करती है. ऐसे में सरकार चाहती है कि यह पैसा सिर्फ सही और जरूरतमंद महिलाओं तक ही पहुंचे.

e-KYC की नई डेडलाइन से राहत

हालांकि, सरकार ने पूरी तरह सख्ती के साथ-साथ राहत भी दी है. पहले e-KYC कराने की अंतिम तारीख 31 मार्च तय की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है. इसका मतलब है कि जिन लोगों के खाते बंद हुए हैं, उनके पास एक और मौका है.

अगर वे इस नई समय सीमा तक अपना e-KYC पूरा कर लेते हैं, तो उनके खाते दोबारा सक्रिय हो सकते हैं और उन्हें योजना का लाभ मिलना फिर से शुरू हो सकता है.

तकनीकी गलती से हुआ बड़ा असर

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक दिलचस्प मामला भी सामने आया. एक मराठी भाषा के सवाल की वजह से करीब 24 लाख लाभार्थियों को गलती से सरकारी कर्मचारी मान लिया गया था. बाद में जब जांच की गई, तो इनमें से लगभग 20 लाख खातों को सही पाया गया.

हालांकि बाकी खातों की जांच अभी भी जारी है. इस घटना ने यह भी दिखाया कि बड़े स्तर पर चल रही योजनाओं में तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आती हैं.

योजना बंद नहीं होगी, सरकार का भरोसा

राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ कहा है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य सिर्फ व्यवस्था को पारदर्शी और सही बनाना है.

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो लोग अपात्र पाए गए हैं, उनसे पहले दी गई राशि की वसूली नहीं की जाएगी. यानी पुराने लाभार्थियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा.

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