आम की खेती पर मौसम का कहर! 42 डिग्री सेल्सियस की गर्मी से गिर रहे फल, पढ़ें एक्सपर्ट टिप्स
Mango Fruit Drop Problem: भारत में आम की खेती के दौरान सबसे बड़ी समस्या फलों का समय से पहले झड़ना है, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. बदलते मौसम, कीट-रोग, पोषण की कमी और हार्मोन असंतुलन इसके मुख्य कारण हैं. ऐसे में सही देखभाल, दवा का छिड़काव, पोषण प्रबंधन और सिंचाई के सही तरीकों को अपनाकर किसान फल झड़ने की समस्या को कम कर सकते हैं.
Fruit Drop In Mango: आम को सिर्फ “फलों का राजा” ही नहीं, बल्कि बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी माना जाता है. भारत में आम की खेती लगभग 23-24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है और इसका उत्पादन करीब 21-22 मिलियन टन तक पहुंचता है. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, आजकल बदलता मौसम, तेज गर्मी और बेमौसम बारिश आम की पैदावार को लगातार प्रभावित कर रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
जलवायु परिवर्तन से बढ़ी मुश्किलें
पिछले कुछ वर्षों में 35-42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती लू और अचानक होने वाली बारिश ने आम की फसल पर बड़ा असर डाला है. डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, यह स्थिति परागण, फल बनने और उनके टिकाव को कमजोर करती है. खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण फलों के झड़ने की समस्या बढ़ गई है.
स्टोन हार्डनिंग स्टेज: फसल का निर्णायक समय
जब आम का फल लगभग चालीस से साठ ग्राम वजन का हो जाता है, तब उसके अंदर गुठली सख्त होने लगती है. इसी अवस्था को ‘स्टोन हार्डनिंग स्टेज’ कहा जाता है. इस चरण में पेड़ यह तय करता है कि वह कितने फलों को आगे बढ़ने के लिए पोषण दे सकता है. रिसर्च बताते हैं कि केवल 3-7 प्रतिशत फल ही पूरी तरह पकने तक पहुंच पाते हैं. इसलिए इस समय पेड़ों की सही देखभाल करना बहुत जरूरी होता है.
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कीट और रोग नियंत्रण के उपाय
फल झड़ने को रोकने के लिए समय पर दवा का छिड़काव जरूरी है:
- फफूंद रोगों के लिए हेक्साकोनाजोल या डाइनोकैप का छिड़काव करें
- मिलीबग और थ्रिप्स के लिए इमिडाक्लोप्रिड या स्पिनोसैड का उपयोग करें
- फल मक्खी से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं
- जैविक विकल्प के तौर पर ब्यूवेरिया बेसियाना का इस्तेमाल किया जा सकता है
हार्मोनल और पोषण प्रबंधन
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, पौधों में सही हार्मोन और पोषण बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यही फल बनने और टिके रहने की क्षमता को प्रभावित करता है. फल झड़ने की समस्या को कम करने के लिए प्लानोफिक्स (NAA) का छिड़काव लाभकारी माना जाता है. साथ ही NAA और GA₃ का संयुक्त प्रयोग करने से फलों के बनने की क्षमता बढ़ती है. इसके अलावा बोरेक्स और जिंक का फोलियर स्प्रे पौधों को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है, जबकि कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव फलों को मजबूत बनाकर उनके गिरने की संभावना को कम करता है.
सिंचाई और पोषण प्रबंधन बेहद जरूरी
इस अवस्था में हल्की और नियमित सिंचाई करनी चाहिए, लेकिन पानी का जमाव नहीं होना चाहिए. ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत के साथ बेहतर परिणाम मिलते हैं. पेड़ों को संतुलित पोषण देने के लिए गोबर की खाद, यूरिया, DAP और पोटाश का सही अनुपात में उपयोग जरूरी है. साथ ही जिंक, बोरॉन और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व फल की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं.