मिडिल ईस्ट जंग का असर! ड्रैगन फ्रूट और एक्सोटिक खेती पर मंडराया संकट, किसानों को भारी नुकसान का डर

Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण एक्सोटिक फलों की खेती करने वाले भारतीय किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है. किसानों का कहना है कि, पौधों के इंपोर्ट में देरी और फर्टिलाइजर की कमी से प्लांटेशन टल रहा है, जिससे लाखों का निवेश फंस गया है और पूरे एक साल की कमाई पर खतरा बन गया है.

नोएडा | Updated On: 6 Apr, 2026 | 05:49 PM

Middle East War Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही, इसका असर भारत के खेतों तक पहुंच गया है. ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो जैसे महंगे और एक्सोटिक फलों की खेती करने वाले किसान अब भारी संकट में हैं. इन फसलों के लिए जरूरी पौधे और उर्वरक (फर्टिलाइजर) बड़े पैमाने पर विदेशों से आते हैं, जो अब बाधित हो रहे हैं. इंपोर्ट रुकने, फर्टिलाइजर की कमी और लाखों के निवेश के फंसने से किसानों के सामने पूरे एक साल की कमाई डूबने का खतरा मंडरा रहा है.

इंपोर्ट रुका, प्लांटेशन में हो रही देरी

पंजाब के पटियाला के रिटायर्ड आर्मी अधिकारी और किसान कर्नल चिरंजीत गेलू ने किसान इंडिया को बताया कि, वे ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, पीच और अमरूद जैसी एक्सोटिक फलों की खेती करते हैं. उनके अनुसार एवोकाडो के पौधे भोपाल और हैदराबाद की कंपनियों के जरिए इजराइल से आते हैं लेकिन मौजूदा हालात के चलते इंपोर्ट पूरी तरह प्रभावित हो गया है. ऐसे में जब भी पौधे आएंगे, उन्हें 5-6 महीने क्वारंटाइन में रखा जाएगा, इसकी वजह से जुलाई में होने वाली प्लांटेशन अब अक्टूबर-नवंबर तक खिसक सकती है.

लाखों का निवेश फंसा, एक साल का नुकसान तय

एक्सोटिक खेती में पहले से ही भारी निवेश करना पड़ता है. खेत की तैयारी, बेड बनाना और ड्रिप इरिगेशन लगाने में 4-5 लाख रुपये खर्च होते हैं. इसके बाद पौधों पर 2-3 लाख रुपये तक का अतिरिक्त खर्च. इसके साथ ही अगर अगर समय पर पौधे नहीं मिले, तो किसान दूसरी फसल भी नहीं उगा सकते. ऐसे में उन्हें पूरा एक साल इंतजार करना पड़ सकता है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान तय है.

फर्टिलाइजर संकट भी बढ़ा रहा परेशानी

मिडिल ईस्ट के देशों जैसे बहरीन, ओमान और कुवैत से आने वाले पोटाश और फॉस्फोरस जैसे जरूरी उर्वरक भी प्रभावित हो रहे हैं. इससे फसलों की ग्रोथ और प्रोडक्शन दोनों पर असर पड़ेगा, खासकर ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलें, जिनका फलन बहुत सीमित समय के लिए होता है.

एक बार चूके तो पूरा सीजन खत्म

हॉर्टिकल्चर फसलों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इनका उत्पादन साल में केवल एक बार होता है.

यानी जंग का असर सिर्फ सप्लाई तक नहीं, बल्कि सीधे किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है.

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एक्सोटिक फलों की खेती को बड़ा झटका दिया है. इंपोर्ट में देरी, फर्टिलाइजर की कमी और बढ़ती लागत ने किसानों के सामने संकट खड़ा कर दिया है. अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर आने वाले समय में बाजार और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

Published: 6 Apr, 2026 | 07:18 PM

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