Dragon Fruit Farming: आजकल किसान सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय नए-नए तरीके अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है, लेकिन इसकी एक बड़ी चुनौती है-पहली फसल आने में 12 से 18 महीने का समय लगना. इस दौरान खेत से कोई खास आमदनी नहीं होती. इसी समस्या का आसान हल बनकर सामने आया है सहफसली खेती का मॉडल, जिसे अपनाकर किसान शुरुआत से ही कमाई कर सकते हैं. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, अगर किसान समझदारी से फसलें चुनें, तो खाली जमीन भी कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है.
ड्रैगन फ्रूट के साथ खाली जमीन का सही उपयोग
ड्रैगन फ्रूट की खेती में पौधों को पोल के सहारे लगाया जाता है और एक पोल से दूसरे पोल के बीच करीब 8 से 10 फीट की दूरी होती है. इस बीच की जमीन अक्सर खाली रहती है, जिसे किसान बेकार समझ लेते हैं. लेकिन यही खाली जगह किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता बन सकती है. अगर इस जगह पर कम ऊंचाई वाली और जल्दी तैयार होने वाली फसलें लगाई जाएं, तो किसान नियमित आय कमा सकते हैं. इससे खेत का हर हिस्सा उपयोग में आता है और नुकसान की संभावना भी कम हो जाती है.
इन फसलों से मिलेगी जल्दी कमाई
विशेषज्ञ के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट के साथ ऐसी फसलें लगानी चाहिए जो ज्यादा जगह न घेरें और कम समय में तैयार हो जाएं. जैसे आलू, मिर्च, गोभी, मूंग और उड़द जैसी फसलें इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती हैं. ये फसलें 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती हैं, जिससे किसानों को जल्दी आमदनी मिलती है. इस तरह जब तक ड्रैगन फ्रूट की पहली फसल नहीं आती, तब तक किसान का खर्च भी निकलता रहता है और आय भी बनी रहती है.
मिट्टी की उर्वरता और खेत की देखभाल में फायदा
सहफसली खेती का फायदा सिर्फ कमाई तक ही सीमित नहीं है. इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. अलग-अलग फसलें लगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है. खासतौर पर दलहनी फसलें जैसे मूंग और उड़द मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती हैं, जिससे खेत ज्यादा उपजाऊ बनता है. इसके अलावा, सहफसली खेती से खरपतवार यानी घास-फूस को भी नियंत्रित करना आसान हो जाता है.
जोखिम कम, मुनाफा ज्यादा
खेती में सबसे बड़ा जोखिम मौसम और बाजार का होता है. अगर किसान सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहता है और वह फसल खराब हो जाए, तो बड़ा नुकसान हो सकता है. लेकिन सहफसली मॉडल अपनाने से यह जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है. एक फसल में नुकसान होने पर दूसरी फसल से आमदनी बनी रहती है. डॉ. रजनीश मिश्रा का कहना है कि यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है. इससे वे अपनी जमीन का पूरा उपयोग कर सकते हैं और धीरे-धीरे अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
खेती में बदलाव से बदलेगी किस्मत
आज के समय में खेती में बदलाव लाना जरूरी हो गया है. पुराने तरीकों के साथ-साथ नए मॉडल अपनाने से ही किसान आगे बढ़ सकते हैं. ड्रैगन फ्रूट के साथ सहफसली खेती एक ऐसा ही मॉडल है, जो कम खर्च में ज्यादा मुनाफा देने का रास्ता दिखाता है. अगर किसान इस तरीके को अपनाते हैं, तो न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि खेती भी ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित बनेगी. यानी थोड़ी सी समझदारी और सही योजना से किसान अपनी खेती को नए स्तर पर ले जा सकते हैं और हर मौसम में कमाई का रास्ता खोल सकते हैं.