कम पानी वाली इस फसल पर सरकार दे रही 3,000 रुपये प्रोत्साहन राशि, शिल्पी नेहा तिर्की ने बताई पूरी योजना
झारखंड में कम पानी वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए मडुआ उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है. किसानों को आर्थिक सहायता देकर इस फसल से जोड़ा जा रहा है. इसका असर खेतों में दिखाई देने लगा है और बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक फसलों की जगह मड़वा की खेती अपना रहे हैं.
Millet Mission: झारखंड सरकार बदलते मौसम और जल संकट की चुनौतियों को देखते हुए खेती में नए विकल्पों को बढ़ावा दे रही है. सरकार का फोकस ऐसी फसलों पर है जिनमें पानी की खपत कम हो और किसानों को बेहतर आमदनी भी मिल सके. इसी दिशा में मडुआ (रागी) जैसी मोटे अनाज की फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी विषय पर किसान इंडिया के खास शो माइक पे मुलाकात में झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की (Shilpi Neha Tirkey) ने बताया कि कंटेंजेंसी प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि मडुआ जैसी फसलें भविष्य की जरूरत हैं और किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही हैं.
मिलेट मिशन के तहत किसानों को मिल रहा आर्थिक सहयोग
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने करीब तीन-चार वर्ष पहले मिलेट मिशन योजना शुरू की थी. इस योजना के तहत धान की खेती छोड़कर मडुआ की खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. ये सहायता अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक उपलब्ध है. सरकार का उद्देश्य किसानों को कम लागत और कम पानी वाली खेती की ओर आकर्षित करना है.
तीन साल में 40 हजार से 1 लाख हेक्टेयर पहुंचा रकबा
झारखंड में मिलेट मिशन का सकारात्मक असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है. राज्य सरकार के इस अभियान ने किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ कम पानी वाली फसलों की ओर आकर्षित किया है. मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में मडुआ (रागी) की खेती का रकबा करीब 40 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. बड़ी संख्या में किसानों ने मडुआ की खेती अपनाई है, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है. सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण ये बदलाव संभव हुआ है, जो राज्य की कृषि नीति की सफलता को दर्शाता है.
गुमला बना मडुआ उत्पादन का बड़ा केंद्र
शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि आदिवासी बहुल गुमला जिला आज झारखंड में मडुआ उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां बड़ी संख्या में किसान मड़वा की खेती कर रहे हैं और बेहतर परिणाम प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि झारखंड के इस मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भी मडुआ खेती और इसके प्रभावों को शोध के लिए चुना है. कृषि मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में मिलेट मिशन के विस्तार से और अधिक किसान इससे जुड़ेंगे. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी मजबूती मिलेगी.
मिलेट मिशन में आवेदन की प्रक्रिया
मिलेट मिशन (श्री अन्न योजना) का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी कृषि केंद्र के माध्यम से आवेदन करना होता है. सबसे पहले किसान पंजीकरण कर आधार और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन पूरा करें. इसके बाद पोर्टल पर लॉग-इन कर मिलेट मिशन योजना का चयन करें और आवेदन फॉर्म में जिला, ब्लॉक, पंचायत, फसल तथा भूमि संबंधी जानकारी भरें. आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज, बैंक पासबुक, राशन कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करें. सभी जानकारी जांचने के बाद आवेदन सबमिट करें और रसीद सुरक्षित रख लें.