NGT की सख्ती के बाद भी नहीं रुकीं अवैध डेयरियां, यमुना के बाढ़ क्षेत्र पर MCD-DPCC से मांगा जवाब

National Green Tribunal: यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अवैध डेयरियों के संचालन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ी नाराजगी जताई है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ और संवेदनशील इलाके में अब भी अवैध डेयरियां चल रही हैं.

नोएडा | Published: 20 Jul, 2026 | 02:24 PM

Illegal Dairies Delhi: दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में चल रही अवैध डेयरियों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि, पहले दिए गए आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाके में अब भी अवैध डेयरी गतिविधियां जारी हैं. इसी वजह से NGT ने नगर निगम दिल्ली (MCD) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को नई कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.

पहले के आदेशों का नहीं हुआ पूरा पालन

एनजीटी की पीठ ने अप्रैल 2024 में दिए गए आदेशों के पालन की समीक्षा की. उस समय यमुना के बाढ़ क्षेत्र, खासकर चक चिल्ला गांव और मयूर नेचर पार्क के आसपास से अवैध डेयरियां हटाने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन हालिया निरीक्षण में पाया गया कि कई जगहों पर गतिविधियां अब भी जारी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि केवल कुछ स्थायी निर्माण हटाने से समस्या खत्म नहीं हुई, क्योंकि डेयरी संचालकों ने अस्थायी ढांचे बनाकर फिर से काम शुरू कर दिया.

निरीक्षण में क्या मिला?

डीपीसीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना के संरक्षित ओ-जोन क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद डीएनडी फ्लाईओवर के नीचे, नमो भारत आरआरटीएस कॉरिडोर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के पास कई अस्थायी पशु शेड मिले. निरीक्षण के दौरान वहां चारे का भंडारण, गोबर के बड़े ढेर और खुले मैदान में चरते करीब 50 से 60 मवेश भी पाए गए. इससे साफ हुआ कि, अवैध डेयरियां अब भी संचालित हो रही हैं.

NGT ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि, डीपीसीसी की रिपोर्ट खुद यह साबित करती है कि उसके आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ. ट्रिब्यूनल ने माना कि अवैध डेयरी संचालक कार्रवाई के बाद भी दोबारा अस्थायी ढांचे बनाकर उसी जगह पर अपना काम शुरू कर देते हैं.

DDA ने भी रखी अपनी बात

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उसने कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है. लेकिन कार्रवाई के कुछ समय बाद फिर से उसी जगह पर अस्थायी डेयरियां बना ली जाती हैं. डीडीए का कहना है कि, मवेशियों को जब्त करने और डेयरी गतिविधियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी एमसीडी और पशुपालन विभाग की है. संबंधित विभागों को कई बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी.

छह सप्ताह में देनी होगी नई रिपोर्ट

एनजीटी ने एमसीडी को छह सप्ताह के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. वहीं डीपीसीसी को अपनी कार्रवाई की समीक्षा करने, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के अनुसार बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई पर विचार करने और अगली सुनवाई से पहले विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है. ट्रिब्यूनल ने साफ संकेत दिया है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित विभाग अवैध डेयरियों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं.

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