FMD Free India: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय डेयरी उत्पादों की यूरोप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहुंच नहीं बन पाई है. इसकी सबसे बड़ी वजह खुरपका और मुंहपका रोग (FMD) है. कई देश केवल उन्हीं जगहों से दूध और डेयरी उत्पाद आयात करते हैं, जहां इस बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण हो. अब केंद्र सरकार इसी चुनौती को खत्म करने के लिए तेज़ी से काम कर रही है.
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बताया कि, सरकार ने अगले दो सालों में कम से कम 9 राज्यों को FMD मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है. इससे भारतीय डेयरी उत्पादों के लिए यूरोप समेत कई बड़े विदेशी बाजारों के दरवाजे खुल सकते हैं.
2030 तक पूरे देश को FMD मुक्त बनाने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक पूरे भारत को FMD मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए देशभर में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जब भारत को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) से FMD मुक्त होने का प्रमाणपत्र मिलेगा, तब भारतीय दूध और डेयरी उत्पाद उन देशों में भी आसानी से निर्यात किए जा सकेंगे, जहां अभी FMD मुक्त होने की शर्त लागू है. इससे डेयरी उद्योग को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
लगातार घट रहे हैं FMD के मामले
सरकार का दावा है कि, टीकाकरण अभियान के अच्छे नतीजे सामने आने लगे हैं. साल 2021 में FMD के 105 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर केवल 40 रह गई. यह दिखाता है कि बीमारी पर धीरे-धीरे नियंत्रण मजबूत हो रहा है. ऐसे में अगर इसी तरह अभियान जारी रहा, तो आने वाले सालों में भारत FMD मुक्त देशों की सूची में शामिल हो सकता है.
38 करोड़ पशुओं को मिला डिजिटल पहचान टैग
पशुओं की पहचान और बीमारियों पर नजर रखने के लिए सरकार डिजिटल तकनीक का तेजी से इस्तेमाल कर रही है. अब तक 38 करोड़ पशुओं को 13 अंकों वाला डिजिटल पहचान टैग दिया जा चुका है. इसके अलावा, इस साल से OTP आधारित टीकाकरण सत्यापन प्रणाली भी शुरू की गई है. अब पशु को टीका लगने के बाद पशुपालक के मोबाइल पर OTP भेजा जाता है. इससे यह पक्का होता है कि रिकॉर्ड में दर्ज टीकाकरण वास्तव में किया गया है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है.
स्वदेशी वैक्सीन से बढ़ी ताकत
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ICAR और पशुपालन विभाग ने मिलकर कई स्वदेशी वैक्सीन विकसित की हैं. इनमें FMD, क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF), PPR और अफ्रीकन स्वाइन फीवर जैसी बीमारियों की वैक्सीन शामिल हैं.
इन स्वदेशी वैक्सीन से पशुओं में बीमारियों पर नियंत्रण आसान होगा और पशुपालकों को भी राहत मिलेगी. साथ ही, पशुधन की उत्पादकता बढ़ेगी और डेयरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.
किसानों और डेयरी उद्योग को होगा फायदा
सरकार का मानना है कि FMD पर पूरी तरह नियंत्रण होने से न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि भारतीय डेयरी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग भी बढ़ेगी. इससे दूध उत्पादकों, पशुपालकों और डेयरी उद्योग को बेहतर दाम मिलने की संभावना है. आने वाले सालों में यह पहल भारत को वैश्विक डेयरी निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है.