भारत का चीनी उद्योग नई सीजन (SSY26) की शुरुआत मजबूत स्थिति में कर रहा है. सेंटरम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ा है, हालांकि इथेनॉल सेक्टर में अभी भी कुछ चुनौतियां हैं. ISMA के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक पूरे भारत में चीनी उत्पादन लगभग 120 लाख मीट्रिक टन (MMT) रहा, जो पिछले साल की 95 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत बढ़ा है. इसमें फैक्ट्रियों की संख्या बढ़ने का भी बड़ा योगदान है. इस समय 504 मिलें चल रही हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 492 मिलें थीं.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यवार आंकड़ों में महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा सुधार दिखाया, जहां उत्पादन 30 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 48.6 लाख मीट्रिक टन हो गया, जो बेहतर गन्ना उपलब्धता और रिकवरी स्तर से संभव हुआ. उत्तर प्रदेश स्थिर रहा, जबकि कर्नाटक में भी अच्छी वृद्धि हुई. कुल मिलाकर, चीनी उद्योग की स्थिति मजबूत बनी हुई है. लेकिन इथेनॉल सेक्टर में कुछ चुनौतियां हैं. भारत में इथेनॉल की मांग लगभग 1,200 करोड़ लीटर पर स्थिर है, जबकि उत्पादन क्षमता करीब 1,500 करोड़ लीटर तक बढ़ा दी गई है. इसकी वजह मुख्य रूप से गन्ना और मक्का की ऊंची लागत है, जो उत्पादन लागत का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा बनाती है.
निर्यात में सीमित अवसरों के कारण ये क्षमता पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रही
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय इथेनॉल निर्माता वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, खासकर ब्राजील और अमेरिका जैसे कम लागत वाले देशों के मुकाबले. इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत लगातार नीति आश्वासनों से उत्साहित होकर देशभर के अनाज और गन्ने आधारित डिस्टिलरी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई. इससे भारत की लंबी अवधि की आपूर्ति तैयारियों में मजबूती आई है. लेकिन मांग स्थिर रहने और निर्यात में सीमित अवसरों के कारण ये क्षमता पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रही है.
सीमित निर्यात क्षमता ने उत्पादन क्षमता के अधूरी उपयोग को जन्म दिया
रिपोर्ट में कहा गया कि लंबी अवधि की आपूर्ति तैयारी, मांग में स्थिरता और सीमित निर्यात क्षमता ने उत्पादन क्षमता के अधूरी उपयोग को जन्म दिया है, जिससे नीति स्थिरता और घरेलू मांग पर निर्भरता बढ़ गई है. कुल मिलाकर, चीनी उद्योग SSY26 में बेहतर उत्पादन और राज्यवार प्रदर्शन से लाभान्वित हो रहा है. वहीं इथेनॉल सेक्टर में स्थिर घरेलू मांग और नीति स्थिरता की जरूरत को और महत्व मिल गया है, ताकि बढ़ी हुई क्षमता का सही उपयोग हो और लंबे समय तक उद्योग स्थिर रहे.