पाकिस्तान के ‘सस्ते चावल’ वाली नीति से भारतीय बासमती को चुनौती, कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव
पाकिस्तान की ड्यूटी ड्रॉबैक योजना के विस्तार की संभावना से भारतीय बासमती निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव आ सकता है.
दुनिया के बासमती चावल बाजार में भारत को आने वाले महीनों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. पाकिस्तान अपनी बासमती निर्यात नीति के तहत ड्यूटी ड्रॉबैक (कर वापसी) लाभ को जून के बाद भी बढ़ाने की तैयारी में है. इससे पाकिस्तानी निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर बासमती बेचने में मदद मिलेगी, जिसका असर भारतीय निर्यातकों की कमाई और बाजार हिस्सेदारी पर पड़ सकता है.
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने जनवरी 2026 में बासमती निर्यातकों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक योजना लागू की थी. इस योजना के तहत 750 डॉलर प्रति टन या उससे अधिक कीमत पर निर्यात किए जाने वाले बासमती चावल पर निर्यातकों को एफओबी (Free on Board) मूल्य का 9 प्रतिशत तक लाभ मिलता है. यह व्यवस्था फिलहाल 30 जून तक लागू है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
क्या होता है ड्यूटी ड्रॉबैक
ड्यूटी ड्रॉबैक एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें सरकार निर्यातकों को उत्पादन और निर्यात प्रक्रिया में लगे कुछ करों व शुल्कों का हिस्सा वापस करती है, ताकि वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहें.
उदाहरण के लिए, यदि कोई पाकिस्तानी निर्यातक 1,000 डॉलर प्रति टन की दर से बासमती चावल बेचता है और उसे 9 प्रतिशत ड्यूटी ड्रॉबैक मिलता है, तो सरकार उसे 90 डॉलर वापस दे देगी. इससे उसकी वास्तविक लागत घटकर 910 डॉलर के बराबर रह जाएगी. नतीजतन, वह खरीदारों को कम कीमत पर चावल बेच सकता है. यही कारण है कि पाकिस्तान की ड्यूटी ड्रॉबैक योजना को भारतीय बासमती निर्यातकों के लिए चुनौती माना जा रहा है.
भारतीय निर्यातकों के मुनाफे पर पड़ सकता है असर
अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बासमती उद्योग को चिंता है कि यदि पाकिस्तान इस प्रोत्साहन योजना को अगले छह महीनों के लिए भी जारी रखता है, तो वैश्विक बाजार में कीमतों का एक नया मानक बन सकता है. इससे भारतीय निर्यातकों पर भी कीमतें कम रखने का दबाव बढ़ेगा और उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी मजबूत करेगा. पाकिस्तान राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (REAP) का मानना है कि कर वापसी योजना से निर्यात लागत कम होगी और पाकिस्तानी चावल की वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत होगी.
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारतीय बासमती चावल का औसत निर्यात मूल्य लगभग 920 डॉलर प्रति टन रहा, जो पाकिस्तान द्वारा निर्धारित 750 डॉलर प्रति टन के स्तर से काफी अधिक है. यही कारण है कि कम कीमतों के आधार पर पाकिस्तान कुछ बाजारों में खरीदारों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है.
कीमतें ज्यादा, लेकिन भारतीय बासमती गुणवत्ता बेहतर
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बासमती की पहचान केवल कीमत के आधार पर नहीं है. इसकी गुणवत्ता, सुगंध और स्थापित ब्रांड वैल्यू दुनिया भर में इसे अलग पहचान देती है. इसलिए केवल कम कीमत के दम पर पाकिस्तान के लिए भारतीय बासमती की पूरी हिस्सेदारी को चुनौती देना आसान नहीं होगा.
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 65.2 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 5.67 अरब डॉलर रही. वहीं अप्रैल 2026 में भारत का बासमती निर्यात 4.74 लाख टन दर्ज किया गया. पश्चिम एशिया के देशों में भारतीय बासमती की मजबूत मांग बनी हुई है और वैश्विक बासमती व्यापार में भारत की हिस्सेदारी अभी भी सबसे अधिक मानी जाती है.
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पाकिस्तान निर्यात प्रोत्साहन जारी रखता है, तो भारत को भी गुणवत्ता, ब्रांडिंग और नए बाजारों पर अधिक ध्यान देना होगा ताकि वैश्विक बासमती व्यापार में उसकी बढ़त बरकरार रह सके.