Vegetable Price Hike: देशभर में एक बार फिर सब्जियों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. उपभोक्ता मामलों के विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान टमाटर, प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों के दाम अधिकांश राज्यों में बढ़े हैं. राजधानी दिल्ली में टमाटर की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है, जबकि प्याज और आलू के भाव भी 3 से 5 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं. हालांकि, सरकार का कहना है कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को सही कीमत मिलना उसकी प्राथमिकता है. लेकिन किसान संगठनों का आरोप है कि किसानों को उनकी फसल का बहुत कम दाम मिलता है, जबकि बाजार में खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. उनका कहना है कि यह व्यवस्था की विफलता को दिखाता है.
17 जून दिल्ली में टमाटर का खुदरा भाव 53 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. वहीं, एक महीने पहले 17 मई को यही कीमत 30 रुपये प्रति किलो थी, जबकि 10 जून को यह 31 रुपये प्रति किलो थी. इसी तरह, प्याज की कीमत भी बढ़कर 32 प्रति किलो हो गई है, जो पिछले हफ्ते से करीब 5 रुपये अधिक है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, टमाटर के दामों में बढ़ोतरी लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में देखी गई है. केवल अंडमान-निकोबार, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, नागालैंड, चंडीगढ़, लद्दाख और तमिलनाडु में ही दाम स्थिर या कम रहे हैं. कहा जा रहा है यह बढ़ोतरी मौसमी कारणों से हुई है और केंद्र सरकार कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है.
दाल और तेल भी महंगे हो गए
टमाटर, प्याज और आलू के अलावा अब चावल, चना दाल, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग दाल, मसूर दाल के साथ-साथ सरसों तेल और पाम ऑयल के दाम भी दिल्ली और कुछ अन्य बड़े शहरों में बढ़ गए हैं. इस कीमत बढ़ोतरी को लेकर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि एक तरफ खुदरा बाजार में दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित लाभ नहीं मिल रहा है.
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कीमतें बढ़ने का फायदा किसानों को नहीं मिलता
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और अखिल भारतीय किसान सभा के नेता अशोक धावले ने ‘द हिन्दू’ से कहा कि यह स्थिति एक बड़ा विरोधाभास है. उनके अनुसार, खुदरा कीमतें बढ़ने का फायदा किसानों को नहीं मिलता, बल्कि बड़े व्यापारियों और कॉरपोरेट कंपनियों को होता है, जिन्हें सरकार का समर्थन प्राप्त है. किसान संगठनों का आरोप है कि उत्पादन करने वाले किसानों को नुकसान हो रहा है, जबकि आपूर्ति और रिटेल व्यापार से जुड़े बड़े खिलाड़ी मुनाफा कमा रहे हैं.
फसल को मंडी तक ले जाना मुश्किल हो गया
महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में किसानों के लिए अपनी फसल को मंडी तक ले जाना भी मुश्किल हो गया है. किसान संगठनों का कहना है कि ईंधन (फ्यूल) की कीमत बढ़ने के बाद ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ गया है, जिससे टमाटर और प्याज जैसी फसलों को बाजार तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अशोक धावले ने कहा कि कई किसान मजबूरी में अपनी उपज को खेतों में ही नष्ट कर रहे हैं.