किसानों के लिए बड़ा खतरा! हर साल 4.33 करोड़ लोग कीटनाशक के जहर की चपेट में, रिसर्च में खुलासा
Pesticide Poisoning: एक नई रिसर्च में कीटनाशकों के इस्तेमाल से किसानों और खेत मजदूरों पर बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई गई है. रिसर्च के मुताबिक दुनियाभर में हर साल करीब 4.33 करोड़ गंभीर पेस्टिसाइड पॉइजनिंग के मामले सामने आ सकते हैं, जो करीब 46 फीसदी किसानों और खेत मजदूरों को प्रभावित करते हैं.
Pesticide Poisoning Farmers: खेती में फसलों को कीड़े-मकौड़ों और बीमारियों से बचाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यही कीटनाशक किसानों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि दुनियाभर में करीब आधे किसान और खेतिहर मजदूर हर साल अनजाने में कीटनाशक के जहर की चपेट में आ सकते हैं. यह रिसर्च ‘फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसमें 2006 से 2023 के बीच सामने आई 214 वैज्ञानिक रिसर्च और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मौत से जुड़े आंकड़ों को देखा गया है.
हर साल 4.33 करोड़ गंभीर मामले
रिसर्च के मुताबिक दुनियाभर में हर साल करीब 4.33 करोड़ गंभीर पेस्टिसाइड पॉइजनिंग के मामले हो सकते हैं. यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर करीब 46 फीसदी किसानों और खेतिहर मजदूरों के बराबर है. रिपोर्ट में करीब 11 हजार मामलों के जानलेवा साबित होने का भी अनुमान लगाया गया है. यानी खेती में इस्तेमाल होने वाले केमिकल का गलत या असुरक्षित तरीके से संपर्क सिर्फ स्वास्थ्य खराब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ मामलों में जान का खतरा भी पैदा कर सकता है.
छिड़काव के दौरान सबसे ज्यादा खतरा
कीटनाशक के संपर्क में आने का खतरा खासतौर पर फसलों पर दवा का छिड़काव करते समय बढ़ जाता है. कई किसान बिना मास्क, दस्ताने, चश्मे और दूसरे सुरक्षा उपकरणों के खेतों में कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में जहरीले रसायन सांस के जरिए शरीर में जा सकते हैं या त्वचा के संपर्क में आ सकते हैं. लंबे समय तक इस तरह का संपर्क स्वास्थ्य के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है.
एशिया और अफ्रीका में ज्यादा मामले
रिसर्च में बताया गया है कि डेवलपिंग देशों में यह समस्या ज्यादा गंभीर दिखाई देती है. दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका में कीटनाशक से होने वाले जहर के मामले ज्यादा पाए गए हैं. पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो का उदाहरण देते हुए रिसर्च में अनुमान लगाया गया है कि वहां हर साल करीब 84 फीसदी किसान गंभीर पेस्टिसाइड पॉइजनिंग की चपेट में आ सकते हैं.
कीटनाशकों का इस्तेमाल भी बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में कीटनाशकों की खपत में भी तेजी आई है. 1990 से 2023 के बीच इनकी वैश्विक खपत दोगुने से ज्यादा हो गई. बढ़ती आबादी के लिए ज्यादा खाद्यान्न पैदा करने का दबाव इसका एक कारण माना जा रहा है. किसान फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ज्यादा मात्रा में रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. कीटनाशकों के खतरों के बावजूद इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुताबिक कीट, बीमारी और खरपतवार हर साल दुनिया की करीब 20 से 40 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए असली चुनौती कीटनाशकों का सुरक्षित और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना है.
किसानों की सुरक्षा पर बढ़ाना होगा ध्यान
PAN इंडिया ने इस रिपोर्ट के आंकड़ों पर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि कीटनाशकों के कारण किसानों और खेत मजदूरों की सेहत पर पड़ने वाले असर को अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर देखना जरूरी है. विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों को कीटनाशकों के सही इस्तेमाल की ट्रेनिंग देने, जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और कम जहरीले या वैकल्पिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने से जोखिम घटाया जा सकता है.