पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कृषि लागत बढ़ेगी, एक्सपर्ट बोले- खरीफ बुवाई से पहले किसानों की बढ़ी टेंशन

Fuel Price Impact On Farmers: देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन महंगा होने से खेती की लागत, सिंचाई और परिवहन खर्च बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. ऐसे में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने सरकार पर किसानों को महंगाई के बोझ तले दबाने का आरोप लगाया.

नोएडा | Updated On: 25 May, 2026 | 04:36 PM

Petrol-Diesel Hike: देश में महंगाई का असर एक बार फिर लोगों की जेब पर दिखने लगा है. सप्ताह की शुरुआत पेट्रोल और डीजल के बढ़े हुए दामों के साथ हुई, जिससे आम लोगों के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. पिछले 10 दिनों में चौथी बार तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं. करीब चार साल तक दाम ज्यादा स्थिर रहने के बाद 15 मई से पेट्रोल और डीजल लगातार महंगे हो रहे हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल लगभग 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है. इससे परिवहन और खेती-किसानी की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.

खरीफ सीजन से पहले बढ़ी मुश्किलें

इस समय देश के कई हिस्सों में किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हैं और खेतों में जुताई-बुवाई का काम तेजी से चल रहा है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं. भारत में आज भी खेती का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है, क्योंकि जुताई, बुवाई, सिंचाई और कटाई जैसे ज्यादातर काम ट्रैक्टर, पंपसेट और हार्वेस्टर मशीनों से किए जाते हैं. डीजल महंगा होने से खेती की लागत सीधे बढ़ जाती है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ सकता है, क्योंकि उनकी आय पहले से ही सीमित होती है.

सिंचाई और परिवहन लागत में इजाफा

डीजल महंगा होने का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता. सिंचाई के लिए चलने वाले पंपसेट का खर्च बढ़ जाता है, वहीं ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी की लागत भी बढ़ जाती है. इसके अलावा फसल को खेत से मंडी तक पहुंचाने में लगने वाला परिवहन खर्च भी बढ़ता है. इससे किसानों की कुल लागत में बड़ा इजाफा होता है. किसानों का कहना है कि उनकी फसलों के दाम उतनी तेजी से नहीं बढ़ते, जितनी तेजी से खेती का खर्च बढ़ रहा है.

राकेश टिकैत ने सरकार पर साधा निशाना

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बढ़ती तेल कीमतों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार की ‘विकास वाली गाड़ी’ इतनी तेज दौड़ रही है कि सिर्फ 10 दिनों में चार बार तेल की कीमतें बढ़ाकर आम जनता की जेब पर बोझ डाल दिया गया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘अच्छे दिन’ शायद सिर्फ तेल कंपनियों के लिए आए हैं, जबकि किसान और आम नागरिक महंगाई के बोझ तले दबते जा रहे हैं.

टिकैत ने यह भी कहा कि, खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा. उन्होंने हाल ही में घोषित खरीफ MSP का जिक्र करते हुए कहा कि मक्का और मूंग जैसी फसलों के दामों में बहुत मामूली बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की मुश्किलें कम नहीं होंगी.

अशोक गहलोत ने वैट कम करने की मांग की

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि ईंधन महंगा होने से सरकार को वैट से ज्यादा कमाई हो रही है, लेकिन इसका बोझ आम लोगों और किसानों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि डीजल महंगा होने से खेती का खर्च बढ़ रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है. गहलोत ने राज्य सरकार से वैट और रोड सेस कम करके लोगों को राहत देने की मांग की है.

खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही, तो इसका असर आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है. जब खेती की लागत बढ़ती है, तो उत्पादन महंगा हो जाता है और इसका असर बाजार में अनाज, सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं के दामों पर पड़ता है. इससे आम उपभोक्ताओं को भी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है.

बढ़ती ईंधन कीमतों का सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है. सीमित संसाधनों के कारण वे पहले ही बढ़ती खाद, बीज और मजदूरी लागत से जूझ रहे हैं. अब डीजल महंगा होने से उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

Published: 25 May, 2026 | 03:26 PM

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