पंजाब की मंडियों में आखिर क्या बदला? कम फसल आने के बाद भी तेजी से उठ रहा गेहूं

इस बार पंजाब में गेहूं की कुल आवक लगभग 122 लाख टन दर्ज की गई है. जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 125 लाख टन था. यानी इस बार लगभग 3 लाख टन कम गेहूं मंडियों में पहुंचा है. इसके बावजूद खरीद और उठान की गति अच्छी रहने से किसानों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 8 May, 2026 | 09:42 AM

Punjab wheat procurement: पंजाब में इस बार गेहूं खरीद सीजन के दौरान किसानों को बड़ी राहत मिलती दिखाई दे रही है. पिछले साल की तुलना में इस बार मंडियों से गेहूं की उठान ज्यादा तेजी से हो रही है. यही वजह है कि मंडियों में भीड़ और जाम की स्थिति काफी कम देखने को मिल रही है. केंद्र सरकार ने हालात को और बेहतर बनाने के लिए पंजाब को 100 अतिरिक्त विशेष रेल रैक भी आवंटित किए हैं, जिनके जरिए लाखों टन गेहूं दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जाएगा.

खाद्य मंत्रालय के अनुसार इस बार फसल की आवक पिछले साल से थोड़ी कम रही है, लेकिन उसके बावजूद गेहूं उठाने की रफ्तार ज्यादा तेज है. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने और भुगतान प्रक्रिया में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है.

पिछले साल से ज्यादा हुई गेहूं की उठान

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 6 मई 2026 तक पंजाब की मंडियों से करीब 78.96 लाख टन गेहूं उठाया जा चुका है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 75.63 लाख टन था. यानी इस बार कम आवक के बावजूद गेहूं उठाने की प्रक्रिया ज्यादा तेज रही है. अधिकारियों का कहना है कि बेहतर प्रबंधन और समय पर परिवहन व्यवस्था की वजह से मंडियों में गेहूं ज्यादा दिनों तक रुका नहीं.

फसल की आवक रही थोड़ी कम

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, इस बार पंजाब में गेहूं की कुल आवक लगभग 122 लाख टन दर्ज की गई है. जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 125 लाख टन था. यानी इस बार लगभग 3 लाख टन कम गेहूं मंडियों में पहुंचा है. इसके बावजूद खरीद और उठान की गति अच्छी रहने से किसानों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.

मंडियों में कम हुआ दबाव

हर साल गेहूं खरीद सीजन के दौरान पंजाब की मंडियों में भारी भीड़ देखने को मिलती है. कई बार किसानों को अपनी उपज बेचने और उठान होने में लंबा इंतजार करना पड़ता है. लेकिन इस बार हालात पहले से बेहतर बताए जा रहे हैं. खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि गेहूं की तेजी से उठान होने के कारण मंडियों में जाम जैसी स्थिति काफी कम हुई है. इससे किसानों को समय पर राहत मिली है और खरीद व्यवस्था भी ज्यादा सुचारु तरीके से चल रही है.

केंद्र सरकार ने भेजीं 100 अतिरिक्त रेल रैक

गेहूं के भंडारण और परिवहन को तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने पंजाब को मई महीने के लिए 100 अतिरिक्त विशेष रेल रैक उपलब्ध कराई हैं. इनकी कुल क्षमता करीब 3 लाख टन बताई गई है. इन रेल रैक के जरिए पंजाब से गेहूं उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों में भेजा जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे मंडियों में गेहूं का दबाव और कम होगा तथा भंडारण की समस्या नहीं आएगी.

पूरे देश में सबसे ज्यादा रैक पंजाब को

सरकारी जानकारी के अनुसार मई 2026 में पूरे देश में कुल 354 विशेष रेल रैक उपलब्ध कराई गई हैं. इनमें से अकेले पंजाब को 201 रैक आवंटित की गई हैं. यानी देशभर में गेहूं परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली कुल रेल रैक का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पंजाब को मिला है. इससे साफ है कि पंजाब अभी भी देश में गेहूं आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है.

अप्रैल में भी मिला था बड़ा हिस्सा

मई से पहले अप्रैल महीने में भी पंजाब को बड़ी संख्या में विशेष रेल रैक दी गई थीं. अप्रैल 2026 में देशभर में कुल 413 रेल रैक आवंटित की गई थीं, जिनमें से 234 पंजाब को मिली थीं. सरकार लगातार पंजाब से गेहूं की तेजी से निकासी पर फोकस कर रही है ताकि खरीद सीजन के दौरान कोई बड़ी दिक्कत न आए.

सीधे भंडारण केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा गेहूं

इस बार सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. अब कई जगहों पर गेहूं को सीधे मंडियों से भंडारण केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है. अप्रैल 2026 में करीब 3.5 लाख टन गेहूं सीधे इस व्यवस्था के जरिए भेजा गया. मई में इसे बढ़ाकर 6.6 लाख टन करने की योजना बनाई गई है. वहीं जून महीने में लगभग 8 लाख टन गेहूं सीधे भंडारण केंद्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

पूरे सीजन में 18 लाख टन सीधे भेजने की तैयारी

सरकार की योजना इस पूरे खरीद सीजन में लगभग 18 लाख टन गेहूं सीधे मंडियों से भंडारण केंद्रों तक पहुंचाने की है. राज्य सरकार की मांग पर इस व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. इससे किसानों को जल्दी राहत मिलने के साथ मंडियों में जगह की कमी जैसी समस्याएं भी कम होंगी.

पंजाब की भूमिका सबसे अहम

पंजाब देश के उन राज्यों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा गेहूं खरीद होती है. देशभर में गेहूं की कुल आवाजाही में पंजाब की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत तक मानी जाती है. इसी वजह से केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य निगम लगातार पंजाब की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

किसानों को क्या फायदा होगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मंडियों से समय पर गेहूं उठता रहेगा तो किसानों को कई तरह के फायदे मिलेंगे. उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. बारिश या खराब मौसम से फसल खराब होने का खतरा भी कम रहेगा. साथ ही भंडारण और परिवहन की बेहतर व्यवस्था से खरीद प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और आसान बनेगी.

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