वैज्ञानिकों की चेतावनी! धरती 30 फीसदी ज्यादा तेजी से होगी गर्म, शिवराज सिंह चौहान ने जताई चिंता

धरती का बढ़ता तापमान अब पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है. वैज्ञानिकों ने ग्लोबल वार्मिंग के पहले से कहीं अधिक तेज होने की आशंका जताई है. इसका असर खेती, जल संकट और मौसम पर पड़ सकता है. शिवराज सिंह चौहान ने पर्यावरण बचाने के लिए पौधारोपण और जल संरक्षण का आह्वान किया.

नोएडा | Updated On: 18 Jul, 2026 | 06:28 PM

जलवायु परिवर्तन को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई और गंभीर चेतावनी जारी की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो धरती पहले के अनुमान की तुलना में 10 से 30 प्रतिशत अधिक तेजी से गर्म हो सकती है. इसका सीधा असर मौसम, खेती, जल स्रोतों और मानव जीवन पर पड़ेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान के कारण भीषण गर्मी, जंगलों में आग, लंबे सूखे और अत्यधिक बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं पहले से ज्यादा देखने को मिल सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष बन सकता है, जबकि प्रशांत महासागर में मजबूत होते अल नीनो के कारण आने वाले वर्षों में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने रह सकते हैं.

सूर्य की ऊर्जा वापस नहीं लौटा पा रही धरती

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता पृथ्वी के बढ़ते ऊर्जा असंतुलन  (Energy Imbalance) को लेकर है. सामान्य परिस्थितियों में पृथ्वी सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का एक हिस्सा अंतरिक्ष में वापस भेज देती है, लेकिन उपग्रहों से मिले आंकड़ों से पता चला है कि पिछले दो दशकों में यह क्षमता लगातार घट रही है. इसका परिणाम यह है कि अधिक सौर ऊर्जा धरती और समुद्रों में ही फंस रही है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्रों के ऊपर ठंडे बादलों की संख्या कम होने और समुद्री तापमान बढ़ने से यह स्थिति और गंभीर होती जा रही है. यही वजह है कि समुद्रों की ऊपरी परतों में भी रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज की जा रही है.

कृषि मंत्री बोले- प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा

वहीं, इस मुद्दे पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा, आज एक खबर पढ़ी. मन सचमुच चिंतित हो गया. धरती हमारी धरोहर है. यदि इसका तापमान लगातार बढ़ता रहा, तो असर केवल मौसम पर नहीं, बल्कि हमारी खेती, पानी, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के जीवन पर भी पड़ेगा. समाधान कठिन नहीं है. हमें अपनी जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल बनाना होगा. एक पौधा लगाना, उसे बड़ा करना, पानी बचाना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना ही सबसे बड़ा योगदान है. प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य बचेगा. उनके इस संदेश को पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी की अपील के रूप में देखा जा रहा है.

खेती, पानी और इंसानी जीवन पर बढ़ेगा असर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग  का सबसे बड़ा असर कृषि, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्रों का बढ़ता तापमान, कमजोर होती प्राकृतिक शीतलन क्षमता और बदलते मौसम चक्र भविष्य में फसलों की उत्पादकता को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा हीटवेव, बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी आपदाओं की तीव्रता भी बढ़ सकती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पृथ्वी की सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने की प्राकृतिक क्षमता को मजबूत करने, बड़े स्तर पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने की दिशा में भी तेजी से काम करना होगा. तभी जलवायु परिवर्तन की बढ़ती रफ्तार को नियंत्रित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा.

Published: 18 Jul, 2026 | 10:01 PM

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